Uttarakhand News, 28 November 2022: चीन में शी जिनपिंग के जीरो कोविड पॉलिसी (Zero Covid Policy) के खिलाफ तेज हुए प्रदर्शन को रोकने के लिए वहां पर सरकार की तरफ से फायरिंग और पिटाई समेत कई तरह के जुल्म किए जा रहे हैं. रैलियों से संबंधित खबरें रोकी जा रही है, और सोशल मीडिया पर निगरानी बढ़ा दी गई है. विरोध प्रदर्शन लगातार दूसरी रात बीजिंग, शंघाई और वुहान समेत कई बड़े शहरों में देखा गया. यही कारण है कि बीते दो-तीन दिनों से चीन के अलग प्रांतों में लोगों ने अब सड़क पर उतरना शुरू कर दिया है. रविवार की रात भी कुछ ऐसी ही थी|चीन की राजधानी बीजिंग में नागरिकों ने एंटी-लॉकडाउन रैली में हिस्सा लिया. रैली में चीनी सरकार के कठोर कोविड-19 प्रतिबंधों के खिलाफ आवाज बुलंद की. AFP की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ घंटों के भीतर ही सैकड़ों लोग लिआंगमा नदी के तट पर जमा हो गए थे, जिनमें से कई के हाथों में कोरे सफेद कागज थे. इसे सेंसरशिप के खिलाफ एक प्रतीकात्मक विरोध माना जाता है. अन्य लोगों ने एक छोटी अस्थायी वेदी पर मोमबत्तियां जलाईं, जहां फूलों के गुलदस्ते भी रखे गए थे. यहां उरुमकी में आग में मारे गए पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी गई|

बात शुरुआत से…

घटना बीते 24 नवंबर की है। चीन के शिनजियांग की राजधानी उरुमकी में 21 मंजिला इमारत में आग लग गई। इस दर्दनाक हादसे में 10 लोगों की मौत हो गई और नौ लोग घायल हो गए। आग इतनी भीषण थी कि इसे बुझाने में तीन घंटे का समय लग गया। अधिकारियों का कहना है कि इमारत के एक बेडरूम में शॉर्ट सर्किट के कारण यह हादसा हुआ।

आग की घटना का प्रदर्शन से क्या है संबंध?

जिस समय 21 मंजिला इमारत में आग लगी, उस समय उरुमकी में कोरोना संक्रमण के कारण लॉकडाउन लगा हुआ था। राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ‘जीरो कोविड पॉलिसी’ के तहत लोगों को आवाजाही की मनाही थी, यहां तक कि सरकारी मशीनरी ने भी यहां के लोगों को उनके हाल पर छोड़ दिया था। आरोप है कि घटना के बाद लॉकडाउन के कारण यहां राहत कार्य शुरू होने में देरी हुई और 10 लोग जिंदा जल गए। इसके बाद लोग गुस्से में आ गए और अगले ही दिन सरकार के खिलाफ सड़क पर उतर आए।

सरकार का क्या तर्क है?

चीन में सरकार विरोधी प्रदर्शन की शुरुआत शिनजियांग से हुई। विरोध बढ़ता देख अधिकारियों ने प्रेसवार्ता की और आरोपों का खंडन किया। हालांकि, इसके बावजूद लोग नहीं माने और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन जोर कर दिया। इस दौरान जीरो कोविड पॉलिसी को वापस लेने की मांग की गई।

अन्य शहरों में कैसे पहुंचा प्रदर्शन:

शिनजियांग के बाद विरोध प्रदर्शन राजधानी बीजिंग पहुंचा। इसके बाद शंघाई में भी लोग सड़क पर उतर आए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इन विरोध प्रदर्शनों के कई वीडियो भी सामने आए, जिसमें लोग राष्ट्रपति जिनपिंग और जीरो कोविड पॉलिसी के खिलाफ नारेबाजी करते नजर आए। इसके अगले ही दिन यह प्रदर्शन चेंगदू और शियान पहुंच गया। आज वुहान शहर में भी लोगों को सड़क पर देखा गया। इस दौरान पुलिस से झड़प की खबरें भी सामने आई हैं।

यहां कोरोना का हाल…

बीते एक सप्ताह से चीन में कोरोना संक्रमण काफी तेजी से फैल रहा है। शनिवार को यहां 24 घंटे में 40 हजार मामले दर्ज किए गए थे। इससे पहले यहां 35 हजार मामले आए थे। बीते कुछ दिनों का रुख करें तो लगातार 30 हजार से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए सरकार ने कई बड़े शहरों में जीरो कोविड पॉलिसी लागू कर दी है। इसके तहत सख्त लॉकडाउन लगाया गया है।

‘मैं यहां अपने भविष्य के लिए हूं’

प्रदर्शनकारियों ने रैली में नारे लगाए, “हम सभी झिंजियांग के लोग हैं! चीनी लोग आगे बढ़ो! लॉन्ग लिव द पीपल!” तियान नाम की एक महिला ने एएफपी को बताया, “मैं यहां अपने भविष्य के लिए हूं… आपको अपने भविष्य के लिए खुद लड़ना होगा. मुझे डर नहीं है, क्योंकि हम कुछ भी गलत नहीं कर रहे हैं, हम कोई कानून नहीं तोड़ रहे हैं. बेहतर कल के लिए हर कोई कड़ी मेहनत कर रहा है.”

‘हमें टेस्ट नहीं खाना चाहिए’

बीजिंग की सड़कों पर चीन की शून्य-कोविड नीति के विरोध में भी लोगों ने नारे लगाए. लोग कहते सुनाई दिए, “हमें न्यूक्लिक एसिड परीक्षण नहीं, खाना चाहिए!” वहीं कुछ लोगों ने देश की सख्त कोविड-विरोधी नियमों से जुड़ी त्रासदियों को याद करते हुए भी नारे लगाए. सितंबर में एक दुर्घटना का जिक्र करते हुए एक ने कहा, “गुइझोउ बस दुर्घटना में मरने वालों को मत भूलना… स्वतंत्रता को मत भूलना.”

शंघाई में प्रदर्शन की आग तेज

शंघाई में भी हजारों लोगों ने सख्त कोविड उपायों का विरोध किया. प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग को पद छोड़ने के लिए भी कहा. शंघाई के विरोध के एक पर्यवेक्षक, फ्रैंक त्साई ने बीबीसी को बताया कि वह इस बात से हैरान थे कि विरोध कितना बड़ा हो गया था. उन्होंने कहा, “मैंने पूरे 15 सालों में शंघाई में इस पैमाने का कोई विरोध प्रदर्शन नहीं देखा है.”