Uttarakhand News 08 Jan 2026: उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने अपनी पत्नी की नृशंस हत्या के आरोपी महेश राम की सजा को बरकरार रखते हुए उसकी अपील को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति रवींद्र मैठानी और न्यायमूर्ति आलोक महरा की खंडपीठ ने सत्र न्यायालय, रुद्रपुर की ओर से वर्ष 2014 में सुनाए गए आजीवन कारावास के फैसले को सही ठहराया है।

मामले के अनुसार महेश राम पर आरोप था कि वह अपनी पत्नी (मृतका) को शादी के बाद से ही प्रताड़ित करता था। घटना से 3-4 दिन पहले उसने अपनी पत्नी के पेट, हाथ और पैर जला दिए थे, जिसके बाद वह अपने मायके चली गई थी। 10 जुलाई 2011 को महेश अपने ससुराल गया और माफी मांगते हुए उस रात वहां रुका। अगली सुबह 11 जुलाई 2011 को प्रातः जब मृतका गन्ने के खेत में गई, तो महेश ने उसका पीछा किया। कुछ ही देर बाद मृतका की चीखें सुनकर जब उसके भाई पवन राम, मां चंदा देवी और अन्य ग्रामीण मौके पर पहुंचे, तो उन्होंने महेश को खेत से भागते हुए देखा। खेत में मृतका का शव लहूलुहान हालत में मिला, उसका गला रेता गया था। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं है और हत्या में इस्तेमाल हथियार भी बरामद नहीं हुआ है।

कोर्ट ने इन तर्कों को खारिज करते हुए माना कि मृतका के भाई और मां ने आरोपी को घटनास्थल से भागते हुए देखा था, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतका के शरीर पर जलने के पुराने निशान पाए गए, जो प्रताड़ना की पुष्टि करते हैं, घटना के बाद आरोपी लंबे समय तक फरार रहा और उसे एक साल बाद नवंबर 2012 में गिरफ्तार किया जा सका। कोर्ट ने इसे उसके दोषी होने का आचरण माना। कोर्ट ने माना कि निचली अदालत की ओर से दी गई आजीवन कारावास और 50,000 रुपये जुर्माने की सजा सही है।