Uttarakhand News 28 Jan 2026: प्रदेश में अब पहचान छिपा कर विवाह करना गैर कानूनी होगा। ऐसा करने पर विवाह निरस्त किया जा सकेगा। साथ ही पहचान छिपाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई भी की जाएगी। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के संशोधित अध्यादेश में यह व्यवस्था की गई है। इसमें विवाह एवं लिव-इन संबंधों में बल, दबाव व धोखाधड़ी अथवा विधि-विरुद्ध कृत्यों के लिए भी कठोर दंडात्मक प्रविधान सुनिश्चित किए गए हैं। एक अहम संशोधन के तहत अब दंडात्मक प्रक्रियाओं के लिए आइपीसी के स्थान पर बीएनएस की नई धाराओं को शामिल किया गया है।
राजभवन की मंजूरी मिलने के बाद संशोधित अध्यादेश लागू हो चुका है। प्रदेश में अब सभी नागरिकों को समान कानून लागू करने के लिए समान नागरिक संहिता लागू की गई है। इसके बाद भी यह देखने में आ रहा था कि कई व्यक्ति अपनी पहचान छिपा कर लिव इन में रह रहे थे अथवा विवाह कर रहे हैं। ऐसे में यूसीसी में और सख्त प्रविधान किए गए हैं।
इसे दंडनीय अपराध बनाते हुए इसमें अर्थ दंड व कारावास की भी व्यवस्था की जा रही है। इसके साथ ही समान नागरिक संहिता में कुछ और संशोधन किए गए हैं। इसके तहत अब अपर सचिव स्तर के अधिकारी भी रजिस्ट्रार जनरल बन सकेंगे। अभी तक केवल सचिव स्तर के अधिकारी ही रजिस्ट्रार जनरल बन सकते थे।
एक अन्य संशोधन में समय से कार्य न करने पर सब रजिस्ट्रार पर लगाए गए दंड के विरुद्ध अपील का प्रविधान किया गया है तथा दंड की वसूली भू-राजस्व की भांति किए जाने की व्यवस्था की गई है। लिव-इन की समाप्ति पर पंजीयक द्वारा समाप्ति प्रमाण पत्र जारी करने का प्रविधान किया गया है। विधवा शब्द के स्थान पर जीवन साथी शब्द को जीवनसाथी शब्द से बदला गया है। विवाह, तलाक, लिव-इन संबंध एवं उत्तराधिकार से संबंधित पंजीकरण को निरस्त करने की शक्ति पंजीयक जनरल को प्रदान की गई है।










