Uttarakhand News 07 Feb 2026: हल्द्वानी । किशोरों में नोमोफोबिया (नो मोबाइल फोन फोबिया) की समस्या लगातार बढ़ रही है। इंटरनेट मीडिया का आभासी परिवेश दिमाग पर ऐसा असर डाल रहा है कि बच्चे थोड़ी सी देर भी स्मार्टफोन से दूर नहीं रह पा रहे हैं। उन्हें वर्चुअल दुनिया में रहने की ऐसी लत लग चुकी है कि अब इसके लिए पढ़ाई छोड़ने को तक तैयार हैं। अभिभावकों के मोबाइल देने से इनकार करने पर आत्मघाती कदम तक उठाने लगे हैं। गाजियाबाद में तीन सगी बहनों के नौ मंजिला इमारत से कूदकर जान देने की वजह भी यही थी।

वहीं, डा. सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय में कुमाऊं क्षेत्र से लगातार ऐसे मामले आ रहे हैं। जिसमें बच्चों ने आनलाइन गेमिंग, चैटिंग और रील को अपनी दिनचर्या का अहम हिस्सा बना लिया है। परिवार और दोस्तों से बातचीत बंद कर घंटों कमरे में बंद रहकर डिजिटल गतिविधियों में सक्रिय रह रहे हैं। मोबाइल लेने पर उनका आक्रामक स्वभाव देखने को मिल रहा है। बीते कुछ समय में इस तरह के केसों में हुई वृद्धि देख मनोविज्ञानी भी हैरत में हैं।

केस 1.
मोबाइल देने से मना किया तो दोस्तों के साथ भागी नौवीं की छात्रा
शुक्रवार को नौवीं में फेल हो गई छात्रा का एक मामला सामने आया है। उसे किताब में मोबाइल रखकर चैटिंग और रील देखने की लत थी। फेल होने पर अभिभावकों ने परीक्षा की कापी खुलवाई तो उसमें कुछ नहीं लिखा था। ऐसे में मोबाइल फोन देने से मना किया तो बच्ची दो छात्रों संग भाग गई। पुलिस को 20 दिन बाद गोवा में मिले। तीनों गोवा के एक होटल में काम कर रहे थे। साथ ही बालिग होने पर विदेश भागने की तैयारी में थे।

केस 2.
पिता ने मोबाइल छीना तो इंटर की परीक्षा देने से किया इन्कार
कालाढूंगी रोड के एक स्कूल में इंटरमीडिएट के छात्र को आनलाइन गेमिंग की लत थी। दिन में करीब 16 घंटे तक मोबाइल पर गेम ही खेलता था। पिता का एटीएम कार्ड चुराकर गेम में करीब 50 हजार रुपये लगाए। पिता ने अकाउंट स्टेटमेंट देखी तो एक गेमिंग प्लेटफार्म पर भुगतान की बात सामने आई। उसके पिता ने मोबाइल छीन लिया। इससे भड़के छात्र ने खुद को कमरे में बंद कर लिया। बोर्ड परीक्षा देने से तक इन्कार करने लगा।

केस 3.
रील देखने से मना करने पर छात्रा हाथों की नस काटने लगी
गोरापड़ाव क्षेत्र के एक स्कूल में हाईस्कूल की छात्रा को मोबाइल पर रोजाना छह से सात घंटे रील देखने की लत थी। बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी की बजाय वह मोबाइल में ही व्यस्त रहती। दिसंबर में परीक्षा कार्यक्रम जारी होने पर अभिभावकों ने पढ़ाई करने को कहा और फोन छीन लिया। गुस्साई छात्रा ने खुद को कमरे में बंद कर दोनों हाथों पर ब्लेड से वार करते हुए नस काटने का प्रयास किया।

केस 4.
फोन ठीक नहीं कराया तो कीटनाशक गटका
पहाड़पानी क्षेत्र में 11वीं का छात्र अपने दोस्तों के साथ घंटों वीडियो काल करता था। उसका फोन पानी में गिरने कर खराब हो गया। माता-पिता ने फोन ठीक कराने से मना कर दिया। इस पर पढ़ाई छोड़ घर से भागने की बात करने लगा। स्वजन ने रोकने का प्रयास किया तो उसने कीटनाशक गटक लिया। हालांकि, समय पर उपचार मिलने से उसकी जान बच गई।

मोबाइल से दूर करने पर किशोरों के आत्मघाती कदम उठाने के मामले बढ़ गए हैं। बच्चों को फोन देने के बाद उसकी निगरानी नहीं करना इसकी मुख्य वजह है। अभिभावक बचपन में फोन कतई न दें। उन्हें किताबें पढ़ने, खेल गतिविधियों में प्रतिभाग करने को प्रेरित करें। साथ ही संवाद जारी रखते हुए उनके क्रियाकलापों पर नजर रखें।