Uttarakhand News 15 May 2026: उत्तरकाशी। नीट-यूजी पेपर लीक मामले में गिरफ्तार गुरुग्राम हरियाणा निवासी यश यादव उत्तरकाशी से बीएएमएस (बैचलर आफ आयुर्वेद मेडिसिन एंड सर्जरी) की पढ़ाई कर रहा था।

वह यहां उत्तराखंड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय से संबंद्ध एक नामी निजी कालेज में बीएएमएस प्रथम वर्ष का छात्र था। लेकिन पिछले चार-पांच माह से लगातार अनुपस्थिति के चलते संस्थान ने पहले उसे कई बार नोटिस दिए, फिर अर्थदंड लगाया। लेकिन बावजूद इसके जब वह उपस्थित नहीं हुआ तो बीते माह संस्थान ने उसे डिबार घोषित कर दिया।

पेपर लीक प्रकरण से देशभर में हड़कंप
बता दें कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की ओर से आयोजित नीट-यूजी परीक्षा के पेपर लीक प्रकरण से देशभर में हड़कंप मचा हुआ है। सीबीआई की टीम ने इस मामले में जयपुर, गुरुग्राम व नासिक से पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया। इनमें फर्रुखनगर गुरुग्राम हरियाणा निवासी यश यादव भी शामिल है.

नासिक से गिरफ्तार एक आरोपित ने यश पर 15 लाख रुपए में नीट-यूजी का प्रश्नपत्र खरीदकर अन्य को भी बेचने का गंभीर आरोप लगाया है। यश ने वर्ष 2023-24 बैच में नीट यूजी के माध्यम से तीसरी काउंसलिंग में यहां उत्तराखंड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय से संबद्ध एक आयुर्वेदिक मेडिकल कालेज में प्रवेश लिया था।

उस दौरान यश को नीट यूजी में 1220510 रैंक हासिल हुई थी, जबकि उसका नीट में परीक्षा में परसेंटाइल करीब 40 था, उसके कालेज के विभागाध्यक्ष ने बताया कि जिस बैच में यश ने प्रवेश लिया था। उसमें आधे छात्र तो छात्राएं थीं। यश ने कालेज के पास ही किराये पर कमरा ले रखा था। एचओडी ने उसका नाम पेपर लीक प्रकरण में आने पर आश्चर्य जताया। कहा कि व्यावहारिक रूप से यश अच्छा छात्र था, शिक्षकों का भी सम्मान करता था।

वह ऐसा गलत काम करेगा, यकीन करना मुश्किल हैं। उन्होंने यश को मामले में फंसाये जाने की भी आशंका जताई। बताया कि उसने प्रथम वर्ष की परीक्षा भी दी। लेकिन फिर वह काफी समय से संस्थान में नहीं आ रहा था, जिस पर उसे नोटिस भी जारी किए गए। एक बार बाइक दुर्घटना में उसका पैर फैक्चर हुआ था, जिस पर वह संस्थान में एक्सरे लेकर पैर का उपचार कराने की सूचना देने आया था। बताया कि लंबे समय से उसकी गैर हाजिरी को देखते हुए उसे 26 अप्रैल को डिबार घोषित किया गया है।

ऐसा कुछ किया है तो नहीं देंगे दोबारा प्रवेश
संस्थान के प्रबंधन से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उनके यहां नीट परीक्षा के आधार पर ही अखिल भारतीय स्तर पर काउंसलिंग के माध्यम से छात्र-छात्राओं को प्रवेश मिलता है। बताया कि कोई छात्र संस्थान के अंदर कुछ गलत न करे, इसकी जिम्मेदारी तो वह लेते हैं। लेकिन कोई बाहर कुछ गलत करेगा तो उसे वह कैसे रोक सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि उक्त छात्र ने इस तरह के गंभीर अपराध को अंजाम दिया है तो उसे संस्थान में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।

साढ़े चार वर्ष का होता है बीएएमएस कोर्स
बीएएमएस एक अंडरग्रेजुएट मेडिकल डिग्री कोर्स है, जिसमें छात्रों को आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति व रोगों के उपचार में सक्षम बनाया जाता है। कोर्स की अवधि साढ़े चार वर्ष होती है, कोर्स को करने के बाद छात्र-छात्राएं एक वर्ष की अलग से इंटर्नशिप भी करते हैं। भारत के किसी भी राज्य में यह कोर्स करने वाले छात्र प्रैक्टिस कर सकते हैं। जिस संस्थान से यश यादव यह कोर्स कर रहा था, वहां पर इसकी प्रतिवर्ष फीस लगभग 2.20 लाख रुपए है।