Uttarakhand News 16 May 2026: पिथौरागढ़ जिले के थल-मुनस्यारी सड़क पर हरकोट के पास एक टैक्सी खाई में गिर गई। हादसे में कार में सवार एक बुजुर्ग की मौत हो गई जबकि चालक सहित पांच अन्य घायल हो गए। गंभीर रूप से चार घायलों को सीएचसी में प्राथमिक इलाज के बाद हायर सेंटर रेफर किया गया।

जानकारी के मुताबिक, शनिवार सुबह क्वीटी से मुनस्यारी जा रही टैक्सी (यूके 05 टीए 5586) हरकोट के पास अनियंत्रित होकर 100 मीटर गहरी खाई में गिर गई। घटना में कार में सवार बला निवासी नेत्र सिंह राणा (70) पुत्र विजय सिंह की मौके पर ही मौत हो गई। इसके अलावा बला निवासी प्रताप सिंह राणा (50) पुत्र दलीप सिंह, हरीश सिंह (24) पुत्र हयात सिंह, ममता (20) पत्नी राजेंद्र सिंह, चालक चंचल सिंह कोरंगा (55) पुत्र कुंवर सिंह और जिमिया निवासी यमुना देवी (39) पत्नी हरीश सिंह घायल हो गए।

आसपास के लोगों की सूचना पर पुलिस और राजस्व विभाग की टीम ने घायलों को खाई से रेस्क्यू कर सीएचसी पहुंचाया। प्रताप सिंह, हरीश सिंह, ममता और चंचल सिंह की गंभीर हालत को देखते हुए चिकित्सकों ने उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया। परिजन तीन घायलों को आपातकालीन सेवा 108, बीआरओ और आईटीबीपी की एंबुलेंस में लेकर जिला अस्पताल के लिए रवाना हुए। वहीं यमुना देवी का सीएचसी में इलाज चल रहा है।

मदकोट में एंबुलेंस होती तो एक घायल को टैक्सी से नहीं लाना पड़ता अस्पताल

मुनस्यारी क्षेत्र में दो आपातकालीन एंबुलेंस 108 की तैनाती है। एक सीएचसी तो दूसरी मदकोट पीएचसी से संचालित होती है। आदि कैलाश यात्रा के लिए नई एंबुलेंस की व्यवस्था तो नहीं की गई लेकिन मदकोट की एंबुलेंस को वहां भेज कर जिम्मेदारी निभा दी गई। इसकी मार हरकोट में हुए हादसे में घायल और उसके परिजनों को चुकानी पड़ी। मुनस्यारी की एंबुलेंस के साथ बीआरओ और आईटीबीपी की एंबुलेंस में तो तीन घायलों को हायर सेंटर भेजा गया। एक घायल के लिए एंबुलेंस न होने से परिजन टैक्सी बुक कर उसे जिला अस्पताल ले जाना पड़ा। यदि मदकोट में एंबुलेंस होती हो घायल और परिजनों को परेशानी नहीं झेलनी पड़ती।

10 साल में तीन हादसे, सात हुए घायल फिर भी नहीं बने पैरापिट और क्रैश बैरियर

थल-मुनस्यारी सड़क पर्यटन और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इस सड़क पर रोजाना सैकड़ों वाहन, यात्री और पर्यटक आवाजाही करते हैं। इस सड़क पर कई डेंजर जोन बने हैं जहां यात्रियों की सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं। जिस जगह हादसा हुआ वहां भी सुरक्षा के इंतजाम गायब हैं। इसी स्थान पर बीते 10 वर्षों में तीन सड़क हादसे हो चुके हैं जिनमें सात लोग घायल हुए हैं। इसके बावजूद यहां पैरापिट और क्रैश बैरियर नहीं बनवाए जा रहे हैं। नतीजतन एक बार फिर से हादसा हो गया जिसमें एक बुजुर्ग को काल के गाल में समाना पड़ा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पैरापिट या क्रैश बैरियर लगाए गए होते तो शायद कार खाई में गिरने से बच जाती।

31 साल से इसी सड़क पर चला रहा है गाड़ी, बर्फबारी में समझा जाता है मास्टर

कार चालक चंचल सिंह कोरंगा पिछले 31 वर्षों से थल-मुनस्यारी सड़क पर वाहन का संचालन कर रहे हैं। अनुभव इतना कि भारी बर्फबारी में भी यात्री उनकी कार में बैठ कर उन पर आंख बंद कर भरोसा करते हैं। यही कारण है कि चंचल को बर्फबारी में वाहन चलाने के लिए मास्टर माना जाता है। वह गांव के प्रधान और बीडीसी सदस्य भी रह चुके हैं। तीन दशकों में यह पहली बार है जब उनका वाहन दुर्घटनाग्रस्त हुआ है।