Uttarakhand News 26 June 2026: उत्तराखंड में मातृ और शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को तकनीक से नई मजबूती मिलने जा रही है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य पोर्टल (आरसीएच) को अपग्रेड कर आरसीएच 2.0 की शुरुआत की है। उत्तराखंड को इसके पायलट प्रोजेक्ट में शामिल किया गया है।
उत्तराखंड में गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और बच्चों तक समय पर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना हमेशा बड़ी चुनौती रहा है।
ऐसे में आरसीएच 2.0 स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी व लाभार्थियों के रिकार्ड प्रबंधन को डिजिटल रूप से मजबूत करेगा। इसका उद्देश्य प्रजनन, मातृ, नवजात और बाल स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाना है।
आरसीएच 2.0 एक वेब और मोबाइल आधारित डिजिटल प्लेटफार्म है। इसके जरिए गर्भावस्था से लेकर बच्चे के जन्म और उसके बाद स्वास्थ्य सेवाओं की पूरी प्रक्रिया को रिकार्ड और मॉनिटर किया जा सकेगा।
इस प्रणाली में लाभार्थी पंजीकरण, हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी, एंटीनेटल केयर, डिलीवरी, पोस्टनेटल केयर, बाल स्वास्थ्य सेवाएं, परिवार नियोजन जैसे कई माड्यूल शामिल किए गए हैं।
इसके अलावा इसे आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन पोषण ट्रैकर डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफार्म से भी जोड़ा गया है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी सूचनाओं का बेहतर आदान-प्रदान संभव हो सकेगा।
इससे सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान और नियमित निगरानी आसान हो सकेगी।
यदि किसी महिला की गर्भावस्था हाई-रिस्क श्रेणी में आती है, तो उसकी जानकारी तुरंत सिस्टम में दर्ज होगी और स्वास्थ्यकर्मी समय रहते जरूरी कदम उठा सकेंगे। आशा कार्यकर्ता व स्वास्थ्य कर्मचारी मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए गांव स्तर पर ही जानकारी दर्ज कर सकेंगे।
इससे कागजी प्रक्रिया कम होगी और रिकार्ड अधिक सटीक रहेंगे। इसके अलावा बच्चों के टीकाकरण, पोषण स्थिति और स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी डिजिटल रूप से उपलब्ध होगी, जिससे कोई लाभार्थी छूटने की संभावना कम होगी।Uttarakhand News 26 June 2026: उत्तराखंड में मातृ और शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को तकनीक से नई मजबूती मिलने जा रही है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य पोर्टल (आरसीएच) को अपग्रेड कर आरसीएच 2.0 की शुरुआत की है। उत्तराखंड को इसके पायलट प्रोजेक्ट में शामिल किया गया है।
उत्तराखंड में गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और बच्चों तक समय पर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना हमेशा बड़ी चुनौती रहा है।
ऐसे में आरसीएच 2.0 स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी व लाभार्थियों के रिकार्ड प्रबंधन को डिजिटल रूप से मजबूत करेगा। इसका उद्देश्य प्रजनन, मातृ, नवजात और बाल स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाना है।
आरसीएच 2.0 एक वेब और मोबाइल आधारित डिजिटल प्लेटफार्म है। इसके जरिए गर्भावस्था से लेकर बच्चे के जन्म और उसके बाद स्वास्थ्य सेवाओं की पूरी प्रक्रिया को रिकार्ड और मॉनिटर किया जा सकेगा।
इस प्रणाली में लाभार्थी पंजीकरण, हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी, एंटीनेटल केयर, डिलीवरी, पोस्टनेटल केयर, बाल स्वास्थ्य सेवाएं, परिवार नियोजन जैसे कई माड्यूल शामिल किए गए हैं।
इसके अलावा इसे आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन पोषण ट्रैकर डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफार्म से भी जोड़ा गया है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी सूचनाओं का बेहतर आदान-प्रदान संभव हो सकेगा।
इससे सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान और नियमित निगरानी आसान हो सकेगी।
यदि किसी महिला की गर्भावस्था हाई-रिस्क श्रेणी में आती है, तो उसकी जानकारी तुरंत सिस्टम में दर्ज होगी और स्वास्थ्यकर्मी समय रहते जरूरी कदम उठा सकेंगे। आशा कार्यकर्ता व स्वास्थ्य कर्मचारी मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए गांव स्तर पर ही जानकारी दर्ज कर सकेंगे।
इससे कागजी प्रक्रिया कम होगी और रिकार्ड अधिक सटीक रहेंगे। इसके अलावा बच्चों के टीकाकरण, पोषण स्थिति और स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी डिजिटल रूप से उपलब्ध होगी, जिससे कोई लाभार्थी छूटने की संभावना कम होगी।










