Uttarakhand News 16 Sep 2026: देहरादून। पुलिस की ओर से नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में अब तक मुख्य रूप से तस्करों की गिरफ्तारी, नशे की बरामदगी और नेटवर्क को तोड़ने पर जोर रहा है।
अब कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए तस्करों की संपत्ति की भी पड़ताल की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपितों ने नशे के कारोबार से अर्जित रकम से कोई मकान, जमीन या अन्य संपत्ति तो नहीं बनाई है।
पुलिस की ओर से ऐसे 20 तस्करों के मकान चिह्नित किए हैं, जिसकी रिपोर्ट जिला प्रशासन से मंगवाई गई है। सहसपुर क्षेत्र में नशा तस्करों के घरों पर हुई कार्रवाई के बाद अब देहरादून शहर और आसपास के नशे के हाटस्पाट में भी बुलडोजर एक्शन की तैयारी है। नशा तस्करों का आपराधिक इतिहास भी खंगाल रही है।
जीआईएस मैपिंग का सहारा
नशे के हाटस्पाट को चिन्हित करने के लिए जीआईएस मैपिंग का सहारा लिया जा रहा है। इसके तहत उन क्षेत्रों को मैप किया जा रहा है, जहां लंबे समय से नशे की बिक्री या तस्करी की शिकायतें सामने आती रही हैं। पुलिस के पास मौजूद पुराने मामलों, गिरफ्तार तस्करों, बरामदगी और स्थानीय स्तर से मिलने वाली सूचनाओं को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया जा रहा है।
तस्करों के ठिकानों की बढ़ाई जा रही निगरानी
जीआईएस मैपिंग के जरिए पुलिस ऐसे क्षेत्रों की पहचान कर रही है, जहां नशे का नेटवर्क अधिक सक्रिय है। इसके बाद इन इलाकों में संदिग्ध गतिविधियों और तस्करों से जुड़े ठिकानों की निगरानी बढ़ाई जा रही है। खास बात यह है कि कार्रवाई केवल छोटे स्तर के पैडलर्स तक सीमित रखने के बजाय उनके पीछे मौजूद नेटवर्क और आर्थिक स्रोतों तक पहुंचने की तैयारी है।
20 मकान रडार पर
शुरुआती स्तर पर करीब 20 मकानों को चिह्नित किया गया है। इनमें ऐसे लोगों की संपत्तियां शामिल हैं, जिनके खिलाफ नशे की तस्करी या बिक्री से जुड़े मामले सामने आ चुके हैं अथवा जिनकी गतिविधियां पुलिस के रडार पर हैं। हालांकि, किसी संपत्ति को ध्वस्त करने से पहले उसके स्वामित्व, निर्माण की वैधता और संबंधित आरोपित की भूमिका की जांच की जाएगी।










