Uttarakhand News 26 Oct 2026: हल्द्वानी शहर के तीनपानी फ्लाइओवर पर शुक्रवार को हुए हादसे में तीन जिंदगियां असमय काल के गाल में समा गईं और एक छात्रा अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रही है। घटना के दो दिन बाद भी यह पता नहीं चल सका कि हादसे के दौरान कार को चला कौन रहा था।
मामले में दुर्घटना के 24 घंटे बाद शनिवार को हल्द्वानी कोतवाली की मंडी चौकी के प्रभारी नरेंद्र कुमार की तहरीर पर अज्ञात कार चालक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। प्रथम दृष्टया हादसे की वजह चालक की लापरवाही, उतावलापन और तेज गति से वाहन चलाना बताई गई है। मामले की जांच एसआई भुवन सिंह राणा को सौंपी गई है। पुलिस हादसे के कारणों और वाहन चलाने वाले की पहचान से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर रही है। कार में सवार सभी लोग नाबालिग थे ऐसे में अब जांच कि आंच मृतक उत्कर्ष के पिता तक भी पहुंचने के आसार हैं।
ये है पूरा मामला
23 अक्तूबर को अपराह्न 3:27 बजे काठगोदाम से लालकुआं की ओर जा रही तेज रफ्तार कार तीनपानी फ्लाइओवर पर डिवाइडर से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार दो से तीन बार पलटने के बाद बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, चालक तेज गति से वाहन चलाते हुए ओवरटेक करने का प्रयास कर रहा था। इसी दौरान कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से जा टकराई। हादसे की आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी। हादसे में इस हादसे में ऊंचापुल निवासी उत्कर्ष धपोला, देवलचौड़ खाम निवासी सिद्धांत पाठक और श्याम विहार, मुखानी निवासी प्रांजय मवाड़ी की मौत हो गई। वहीं, पीलीकोठी निवासी छात्रा भाविका गंभीर रूप से घायल हो गई जिसका दिल्ली में उपचार चल रहा है।
पिता की कार, जांच के घेरे में वाहन मालिक
जानकारी के अनुसार, कार स्वामी भीमताल डायट में तैनात प्रोफेसर शैलेंद्र धपोला हैं। जानकारी के अनुसार, 23 अक्तूबर उनका बेटा उत्कर्ष कार से कोचिंग सेंटर के साथियों के साथ तीनपानी की ओर जा रहा था। इसी दौरान हादसा हो गया। हालांकि दुर्घटना के समय कार कौन चला रहा था, इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
नाबालिग की ड्राइविंग पर सख्त प्रावधान
1.तीन साल की कैद और 25 हजार जुर्माना।
- वाहन का पंजीकरण 12 महीने के लिए रद्द करने का प्रावधान।
- नाबालिग को 25 साल तक ड्राइविंग लाइसेंस देने पर प्रतिबंध।
बचाव का भी है रास्ता-
यदि वाहन स्वामी या अभिभावक यह साबित कर दें कि वाहन का इस्तेमाल उसकी जानकारी के बिना हुआ था या उसे रोकने के लिए सावधानी संबंधी प्रमाण प्रस्तुत करने पर दंड से बचाव का प्रावधान है।
हादसे के मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जा रही है। यदि नाबालिग के वाहन चलाने की पुष्टि होती है तो वाहन स्वामी की भूमिका भी जांच के दायरे में आएगी। संबंधित अभिभावक या वाहन स्वामी के खिलाफ कार्रवाई से पहले नियमानुसार जांच-पड़ताल की जाएगी। – हरबंश सिंह, एसपी सिटी
नियमों के अनुसार नाबालिग को वाहन देने और हादसा होने के मामले में वाहन स्वामी जिम्मेदार माना जाता है। हादसे में हुए नुकसान का क्लेम आदि के भुगतान भी रोक दिया जाता है। लोगों से अपील है कि अपने नाबालिग बच्चों को वाहन कतई न दें।










