Uttarakhand News 14 Feb 2026: सरकारी नीतियों और योजनाओं में नीति निर्धारण के समय सरकार की कोशिश जरूरतमंदों तक पहुंचने की होती है, मगर जब इन्हीं अधिकारों से कोई व्यक्ति वर्षों तक वंचित रहे तो व्यवस्थाओं पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ऐसा ही कुछ बच्छणस्यूं पट्टी के क्वल्ली गांव निवासी बुजुर्ग नरेंद्र सिंह पंवार के साथ वर्षों से हो रहा है।
नरेंद्र के पास संपत्ति और परिवार के नाम पर दो बैल है, जिन्हें वह छोड़ना नहीं चाहते। आधार कार्ड भी नहीं है लेकिन बोलने और सुनने में असमर्थता के कारण अपनी समस्या बयां भी नहीं कर सकते। अत्यधिक आर्थिक तंगी और व्यवस्थाओं की कमी ने उनके हिस्से में अभावों का पहाड़ खड़ा कर दिया है।
दया पर जीवन यापन कर रहे
योजनाओं के नाम पर भी अब तक उनके हिस्से कुछ नहीं आया है। ग्रामीणों के अनुसार, उन्हें न तो विकलांग पेंशन मिलती है और न ही अंत्योदय योजना का लाभ। गांव के बुजुर्ग रघुवीर सिंह रावत का कहना है कि उनके पास पहले एक राशन कार्ड था, जिससे उन्हें सरकारी गल्ले से राशन मिलता था, मगर वह भी गुम हो जाने के बाद अब वह लोगों की दया पर जीवन यापन कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि वह एक-दो बार नरेंद्र सिंह को मुख्यालय के सरकारी दफ्तरों के चक्कर भी कटवा चुके हैं, लेकिन अब तक उन्हें कोई लाभ नहीं मिल पाया है। गांव की प्रधान ममता देवी का कहना है कि वह वर्षों से उन्हें इसी स्थिति में देख रही हैं। ग्रामीणों की मदद से उनकी आजीविका चलती है। वह अपने बैलों को छोड़कर कहीं नहीं जाते, ऐसे में कागजी प्रक्रिया पूरी करने में भी दिक्कत होती है।
उक्रांद नेता अर्जुन कंडारी ने कहा कि 21वीं सदी में हैं और अभी तक लोग मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे हैं। उन्होंने सरकार से नरेंद्र के लिए मदद की गुहार लगाई। इस संबंध में सीडीओ राजेंद्र सिंह रावत का कहना है कि नरेंद्र की समस्याएं संज्ञान में आई हैं। इसके कारणों की जांच की जाएगी और मैं स्वयं प्रभावित तक पहुंचकर सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का प्रयास करूंगा।










