Uttarakhand News 1 July 2026: उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) ने उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (यूईआरसी) के समक्ष 5,900 करोड़ के अतिरिक्त एग्रीगेट रेवेन्यू रिक्वायरमेंट (एआरआर) का दावा किया है। एआरआर का मतलब है कि बिजली कंपनी को निश्चित अवधि में अपने खर्चों को पूरा करने के लिए कुल कितने राजस्व की जरूरत है।
यूपीसीएल का कहना है कि वर्ष 2003-04 से 2026-27 के बीच राज्य गठन के बाद लागू हुई ट्रांसफर स्कीम के कारण उस पर वित्तीय बोझ पड़ा। उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड को बिजली व्यवस्था, परिसंपत्तियां, देनदारियां, ऋण और अन्य वित्तीय दायित्व हस्तांतरित किए गए थे।
निगम का दावा है कि इनसे जुड़े कुछ खर्च अब तक उसके राजस्व में शामिल नहीं किए गए, इसलिए उनकी भरपाई की जानी चाहिए। इस पर नियामक आयोग ने उपभोक्ताओं से राय मांगी है।
5,900 करोड़ का हिसाब कैसे बना?
यूपीसीएल का दावा है कि 936.37 करोड़ रुपये अतिरिक्त एग्रीगेट रेवेन्यू रिक्वायरमेंट व 4,963.35 करोड़ रुपये कैरिंग कास्ट अर्थात ब्याज आदि के बन रहे हैं। इन दोनों को मिलाकर कुल दावा 5,900.01 करोड़ का बनता है।
क्या बिजली के बिल बढ़ जाएंगे?
अभी केवल यूपीसीएल ने दावा किया है। इस पर अंतिम फैसला उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (यूइआरसी) करेगा। आयोग पहले दावे की जांच करेगा, फिर उपभोक्ताओं और अन्य हितधारकों की राय सुनेगा और उसके बाद तय करेगा कि दावा पूरी तरह स्वीकार किया जाए, आंशिक रूप से स्वीकार किया जाए या खारिज कर दिया जाए। अगर आयोग पूरी या कुछ राशि मंजूर भी करता है, तब भी जरूरी नहीं कि पूरा बोझ एक साथ उपभोक्ताओं पर डाला जाए।
उपभोक्ताओं से राय क्यों मांगी गई?
यूइआरसी ने इस याचिका को सार्वजनिक करते हुए 27 जुलाई 2026 तक उपभोक्ताओं, उद्योगों और अन्य हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। यदि किसी उपभोक्ता या संस्था को लगता है कि यूपीसीएल का दावा उचित नहीं है या उसमें कोई त्रुटि है, तो वे आयोग के समक्ष अपना पक्ष रख सकते हैं। सभी पक्षों पर विचार करने के बाद ही अंतिम आदेश जारी किया जाएगा।










