Uttarakhand News 11 Mar 2026: प्रदेश में जिन सरकारी विभागों पर कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने और विकास कार्यों को गति देने का जिम्मा है, वे बजट खर्च में पिछड़ने पर धनराशि समर्पित कर रहे हैं।

10 करोड़ या इससे अधिक राशि खर्च नहीं होने पर यह नौबत आई है। ऐसे 28 विभागों ने 2366.13 करोड़ की राशि का उपयोग करने से ही हाथ खड़े कर दिए।

भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) ने वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए अपनी रिपोर्ट में राज्य के वित्त और बजटीय प्रबंधन में इन खामियों को निशाने पर लिया है।

यही नहीं, अनुपूरक बजट की 2477 करोड़ की राशि को भी खर्च नहीं करने के कारण लौटाना पड़ा। इस प्रकार 4000 करोड़ से अधिक का अनुपूरक अनुदान अनावश्यक साबित हुआ।

प्रदेश सरकार जनहित में बजट के अधिक सदुपयोग पर जोर तो दे रही है तो विभाग अनुपूरक अनुदान के लिए हामी भरने में पीछे नहीं रहते, लेकिन बजट खर्च को लेकर तस्वीर एकदम उलट जाती है।

शिक्षा, खेल एवं युवा कल्याण और संस्कृति के मद में वर्ष 2023-24 में मूल रूप से 9905.15 करोड़ का बजट रखा गया। बाद में अनुपूरक में 243.22 करोड़ और प्राप्त किए गए। हालत देखिए, कुल मिलाकर इसमें से 634.21 करोड़ की राशि खर्च नहीं हो सकी। यानी बच गई।

चिकित्सा, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग ने अनुपूरक में 598.81 करोड़ मांग लिए, बाद में 860.61 करोड़ खर्च होने से ही बच गए।

इसी प्रकार के कारनामे में कल्याण योजनाएं, सहकारिता, ग्रामीण विकास, लोक निर्माण, उद्योग, खाद्य, वन, पशुपालन, अनुसूचित जातियों व जनजातियों का कल्याण के मदों में बजट का उपयोग करने वाले कई विभाग सम्मिलित हैं।

31 योजनाओं में समर्पित करने पड़े 949 करोड़
ऐसी कई योजनाएं भी हैं, जहां अनुपूरक प्रविधान 10 करोड़ या अधिक गैर जरूरी साबित हुआ।

भूमि खरीद एवं बीमा पालिसी, जी-20 सम्मेलन, संपदा विभाग, समग्र शिक्षा, विद्यालय हास्टल निर्माण, श्रीनगर मेडिकल कालेज निर्माण कार्य, स्वच्छ भारत मिशन, पार्किंग निर्माण, मनरेगा और उत्तराखंड सामाजिक लेखा परीक्षा, पीएमश्री योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम समेत लगभग 31 योजनाओं में 949.32 करोड़ समर्पित करने पड़ गए।

नियमित खर्च में आकस्मिकता निधि से 111 करोड़
कैग ने राज्य आकस्मिकता निधि, राजस्व बकाया वसूली, करेत्तर राजस्व में सुधार की आवश्यकता व्यक्त की है।

आकस्मिकता निधि का उपयोग तो वेतन, कार्यालय खर्च, मानदेय, मजदूरी जैसे नियमित प्रकृति के लेन-देन के लिए हो रहा है। इसमें 111.30 करोड़ की राशि नियमों का उल्लंघन कर उपयोग में लाई गई। कैग ने इसे खराब बजटिंग का नमूना बता दिया।