Uttarakhand News 19 Jan 2026: हरिद्वार। अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज के तत्वावधान में शताब्दी समारोह का शुभारंभ ध्वज वंदन के साथ किया गया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, केंद्रीय संस्कृति व पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, शताब्दी समारोह के दलनायक डा. चिन्मय पंड्या, पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज सहित हजारों स्वयंसेवकों की मौजूदगी में नवसंकल्प के साथ बैरागी द्वीप में शताब्दी ध्वज लहराया गया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि ऐसे आयोजनों से सनातन की प्रतिष्ठा बढ़ती है।

यह सामान्य आयोजन नहीं है, इसमें 80 से अधिक देशों से स्वयंसेवक, प्रतिनिधि को बुलाया गया है। इस समारोह से जो अमृत निकलेगा, वह सनातन और भारत के लिए काम करेगा।

ध्वज वंदन करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि गायत्री परिवार को किसी एक संगठन की सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता, यह युग चेतना का वह प्रवाह है, जो व्यक्ति से समाज व समाज से राष्ट्र के उत्थान की ओर अग्रसर करता है।

यह समारोह गायत्री परिवार की संस्थापिका माता भगवती देवी शर्मा के तपस्वी जीवन, निस्वार्थ सेवा व अखंड साधना के प्रति राष्ट्र की कृतज्ञता की भी अभिव्यक्ति है।

मुख्यमंत्री ने देवभूमि उत्तराखंड की आध्यात्मिक चेतना का स्मरण करते हुए कहा कि गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, बदरीनाथ व आदि कैलाश जैसे तीर्थस्थल भारत की आत्मा की धड़कन हैं।

देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डा. चिन्मय पंड्या ने कहा कि यह समारोह किसी वैराग्यपूर्ण एकांत तपोभूमि का आयोजन नहीं है, बल्कि यह पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य श्री का “खोया-पाया विभाग” है, जहां व्यक्ति स्वयं को और अपने दायित्व को पुनः खोजता है।

शताब्दी समारोह का उद्देश्य भी इसी चेतना को जाग्रत करना है, ताकि विचार, आचरण व कर्म के स्तर पर सकारात्मक बदलाव संभव हो सके।

नवयुग निर्माण में मील का पत्थर साबित होगा शताब्दी समारोह : शेखावत
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि सेवा, साधना व संस्कार के त्रिवेणी संगम यह शताब्दी समारोह नवयुग निर्माण में मील का पत्थर साबित होगा।

विश्व की महान सभ्यताओं का निर्माण सामूहिक चरित्र निर्माण के माध्यम से ही संभव हुआ है। जब समाज के व्यक्ति नैतिक मूल्यों, अनुशासन और सेवा भाव को अपने जीवन का आधार बनाते हैं, तभी सशक्त संस्कृति और स्थायी सभ्यता का निर्माण होता है।

जनशताब्दी समारोह इसी सामूहिक चेतना को जाग्रत करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला, स्वामी संपूर्णानंद, स्वामी वेलु बापू, वरिष्ठ पत्रकार सुरेश चव्हाण, ईडी के पूर्व निदेशक राजेश्वर सिंह, विनय रुहेला, न्यायाधीश परविंदर सिंह, के. नारायण राव, रमेश भट्ट, दिनेश कांडपाल, आचार्य डा. दयाशंकर विद्यालंकार को शांतिकुंज के प्रतीक चिह्न, गंगाजली, रुद्राक्ष की माला के साथ सम्मानित किया गया।

शैलदीदी ने स्वयंसेवकों को दिया स्नेह का पोषण
हरिद्वार: ध्वज वंदन समारोह के दोपहरकालीन सभा में अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख शैलदीदी पहुंची। उनके सान्निध्य मात्र से ही सेवाभाव में जुटे स्वयंसेवकों के चेहरे उल्लास और ऊर्जा से भर उठे।

शैलदीदी ने कहा कि स्वयंसेवक का निस्वार्थ श्रम, अनुशासन और समर्पण ही युग-परिवर्तन की नींव रखता है। उन्होंने गायत्री परिवार की संस्थापिका माता भगवती देवी शर्मा के त्यागशीलता की गाथा से अवगत कराया।

शताब्दी समारोह के दलनायक डा. चिन्मय पण्ड्या ने स्वयंसेवकों को युग निर्माण योजना में जुट जाने के प्रेरित किया। इससे पहले शैलदीदी ने शताब्दी समारोह में स्थापित स्मारक, विराट पुस्तक मेले एवं भव्य प्रदर्शनी का अवलोकन किया।

उन्होंने प्रदर्शनी में प्रस्तुत विचार, साहित्य और चित्रात्मक प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए इसे युगचेतना के विस्तार का सशक्त माध्यम बताया और इसका विधिवत शुभारंभ किया। वहीं, शांतिकुंज व्यवस्थापक योगेन्द्र गिरि, गौरीशंकर सैनी ने भी विचार रखे।