Uttarakhand News 19 Mar 2026: जिले की विशेष अदालत ने प्रेम संबंधों के टूटने के बाद दर्ज कराए गए दुष्कर्म के एक मामले में आरोपित युवक को बरी कर दिया। अदालत ने युवती के हाथ पर आरोपित के नाम का टैटू गुदा होने और उनके चार साल के गहरे संबंधों को फैसला का आधार बनाया।
अपर जिला एवं सेशन जज रजनी शुक्ला की अदालत ने बुधवार को जारी फैसले में टिप्पणी की कि जब कोई बालिग और शिक्षित महिला लंबे समय तक किसी के साथ स्वेच्छा से रहती है, तो उसे जबरदस्ती की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। इस मामले में पंजाब के रूप नगर के रहने वाले साहिल धीमान को बरी कर दिया।
सुनवाई के दौरान अदालत में यह रोचक तथ्य सामने आया कि पीड़िता ने अपने दाहिने हाथ पर अभियुक्त के नाम का टैटू बनवाया था।
अदालत ने इसे गहरे प्रेम और मर्जी से बने संबंधों का पुख्ता प्रमाण माना। पीड़िता ने खुद स्वीकार किया कि उनके बीच रोका की रस्म हुई थी, जिसमें लड़के वालों ने उसे चांदी की पायल दी थी और सिर पर चुनरी ओढ़ाई थी। यहां तक कि सगाई की तस्वीरें भी साक्ष्य के रूप में पेश की गईं।
उसी दौरान यह बात आई कि दोनों चंडीगढ़, धर्मशाला और देहरादून के होटलों में एक साथ रुकते थे। पीड़िता ने यह भी माना कि वह दो बार गर्भवती हुई और अभियुक्त ने ही उसका गर्भपात कराया था, जिसके लिए डाक्टर को पैसे भी अभियुक्त ने ही दिए थे।
केस दर्ज होने के बाद भी हुआ था रुपयों का लेन-देन
अदालत के सामने सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह आया कि अप्रैल 2023 में हुई जिस कथित वारदात को आधार बनाकर मुकदमा दर्ज किया गया, उसके तीन दिन बाद भी पीड़िता ने अभियुक्त से गूगल पे के माध्यम से पैसे लिए थे।
अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता एक 24 वर्षीय शिक्षित और कामकाजी महिला है। यदि उसके साथ पहली बार 2018 में जबरदस्ती हुई थी, तो उसने उसी समय शिकायत क्यों नहीं की? चार साल तक रिलेशनशिप में रहने और शादी की बात टूटने या पैसों के विवाद के बाद ऐसे आरोप लगाना विश्वसनीय नहीं प्रतीत होता।










