Uttarakhand News 24 Feb 2026: देहरादून। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डा. मोहन भागवत ने पूर्व सैनिकों के साथ संवाद में सामाजिक समरसता को सर्वोपरि बताया।
उन्होंने कहा, दो हजार वर्षों तक अस्पृश्यता और भेदभाव झेलने के बाद भी हिंदू समाज के एक हिस्से ने कभी देश के साथ गद्दारी नहीं की।
इस वर्ग को समाज में बराबरी का स्थान देने के लिए यदि दो सौ वर्ष भी आरक्षण देना पड़े, तो तैयार रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि अपने भाइयों के उत्थान की खातिर आरक्षण देना पड़ेगा तो देंगे, अपनों के लिए नुकसान भी सहेंगे।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से हिमालयन कल्चरल सेंटर में आयोजित प्रमुखजन गोष्ठी में सरसंघचालक डा. मोहन भागवत ने कहा, स्वतंत्रता के बाद कई राजनीतिक दल अपने मूल मार्ग से भटक गए हैं।
उन्होंने समाज की एकता पर बल देकर कहा कि सामाजिक शक्ति ही व्यक्तियों व नेतृत्व को बल प्रदान करती है। यदि समाज कमजोर है तो नेतृत्व प्रभावी नहीं हो सकता।
कहा कि वर्ष 1857 की क्रांति में पराजय का बड़ा कारण आपसी एकता का अभाव था। राजनीतिक जागरूकता व क्रांतिकारियों के संघर्ष से बाद में एकजुटता का भाव पैदा हुआ और देश आजाद हुआ।
विदेशी घुसपैठियों को रोजगार न दें
सरसंघचालक ने दो टूक कहा, विदेशी घुसपैठ को किसी भी कीमत पर स्वीकारा नहीं जाएगा। घुसपैठियों की पहचान स्पष्ट होनी चाहिए और देश में किसी भी विदेशी घुसपैठिये को रोजगार नहीं दिया जाना चाहिए। इसे उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा व देश की आर्थिकी से जुड़ा विषय बताया।










