Uttarakhand News 10 Mar 2026: (चमोली)। विषम भौगाेलिक परिस्थितियों वाले उत्तराखंड में तमाम झंझावत से जूझ रही खेती-किसानी की अब न केवल तस्वीर बदलेगी, बल्कि इससे अन्नदाता की झोलियां भी भरेंगी। राज्य के बजट में इसके लिए कई प्रविधान किए गए हैं।

विशेषकर श्रीअन्न यानी मोटे अनाज उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ ही सगंध खेती के दृष्टिगत महक क्रांति नीति इसमें नये आयाम जोड़ेगी। यही नहीं, किसानों को सहयोग, आधुनिक तकनीकी, बेहतर बाजार और मजबूत अवसंरचना देने पर भी बजट में जोर दिया गया है।

आत्मनिर्भरता के लिए कृषि के साथ उद्योग को भी जोड़ा गया है। साथ ही कृषि से जुडे रेखीय क्षेत्रों के अंतर्गत पशुपालन, मत्स्य, चाय विकास, औद्यानिकी, उद्यान बीमा, वन्यजीवाें से फसल सुरक्षा को घेरबाड़ के लिए भी बजट प्रविधान किए गए हैं।

खेती के सामने खड़ी चुनौतियों से पार पाने की झलकी चिंता
राज्य में कृषि एक नहीं अनेक चुनौतियों से जूझ रही है। 95 विकासखंडों में से 71 में खेती पूरी तरह से बारानी यानी वर्षा पर निर्भर है। यानी समय पर वर्षा हो गई तो ठीक, अन्यथा बिन पानी सब सून।

यही नहीं, पलायन के कारण गांव खाली हो रहे हैं तो खेत खलिहान बंजर में तब्दील। रही-सही कसर पूरी कर दी है फसलों को वन्यजीवों द्वारा पहुंचाए जा रहे नुकसान ने।

परिणामस्वरूप परती खेती का रकबा भी बढ़ रहा है। परती यानी, ऐसी भूमि जिस पर कभी खेती होती थी और अब लोगों ने वहां खेती करना छोड़ दिया है।

राज्य में ऐसी भूमि 2.15 लाख हेक्टेयर पहुंच चुकी है। बजट में इन चुनौतियों से पार पाने की चिंता भी झलकी है। यही कारण भी है कि मोटे अनाज व सगंध खेती पर सरकार विशेष जोर दे रही है, जो यहां की परिस्थितियों के अनुकूल हैं और किसानों को दाम भी बेहतर मिलते हैं।

मिलेट मिशन के लिए 12 करोड़
मंडुवा, झंगोरा, रामदाना, कौणी जैसे मोटे अनाज उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए राज्य में मिशन मिलेट प्रारंभ किया गया है। सरकार ने मंडुवा, झंगोरा की सरकारी स्तर पर खरीद की व्यवस्था भी की है, जिसके बेहतर परिणाम आए हैं।

मिलेट मिशन के माध्यम से पोषण सुरक्षा और किसानों की आय में सुधार पर जोर दिया गया है। इस बार सरकार ने मिलेट मिशन के लिए 12 करोड़ रुपये का बजट प्रविधान किया है। यही नहीं मोटे अनाज को सीधे बाजार से भी जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

महक क्रांति से विकसित होंगी अरोमा घाटियां
परंपरागत फसलों की अपेक्षा अधिक आय देने वाली सगंध खेती पर भी सरकार का जोर है। इसके लिए 10 साल के लिए महक क्रांति नीति लाई गई है। इसके तहत राज्य के आठ जिलों में सात अरोमा घाटियां विकसित की जाएंगी।

वहां लैमनग्रास, तिमूर, तेजपात, मिंट जैसी सगंध फसलों की खेती की जाएगी और 10 साल में इससे 90 हजार किसानों को जोड़ने का लक्ष्य है।

यह नीति इसी वर्ष से धरातल पर उतरेगी। सरकार ने बजट में इसके लिए 10 करोड़ रुपये का प्रविधान किया है। ऐसे में उम्मीद जगी है कि अब बंजर खेतों में भी सगंध फसलें लहलहाएंगी।

कृषि क्षेत्र के प्रमुख बजट प्रविधान
मिशन एप्पल के लिए 42.00 करोड़
कीवी, ड्रैगन फ्रूट जैसे उच्च मूल्य वाले फलों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 30.70 करोड़
सगंध फसलों के क्लस्टर विकसित करने के लिए 24.75 करोड़
मुख्यमंत्री राज्य कृषि विकास योजना के लिए 20.00 करोड़
फसलों की सुरक्षा के लिए घेरबाड़ के लिए 20.00 करोड़
मिलेट मिशन के लिए 12.00 करोड़
स्थानीय फसलों के प्रोत्साहन को 5.75 करोड़
किसान पेंशन योजना के लिए 12.06 करोड़
ट्राउट प्रोत्साहन योजना के लिए 39.90 करोड़
आइटीबीपी को जीवित भेड़-बकरी व कुक्कुट आपूर्ति योजना के लिए 3.50 करोड़
दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना के लिए 42.50 करोड़
हाउस आफ हिमालयाज के लिए 5.00 करोड़
दुग्ध मूल्य प्रोत्साहन योजना के लिए 32.00 करोड़
मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना के लिए 12.43 करोड़