Uttarakhand News 13 June 2026: ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का पहला चरण जून 2028 तक पूरा हो जाएगा। पहले चरण में ट्रेनों का संचालन ब्यासी तक होगा। दिसंबर 2029 तक ट्रेन को कर्णप्रयाग तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
रेलवे की स्थायी संसदीय समिति ने परियोजना के कामों की समीक्षा की। रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) के अधिकारियों ने समिति को अब तक हुए कार्यों की जानकारी दी।
परियोजना में 13 स्टेशन शामिल
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना गढ़वाल मंडल के पर्वतीय जिलों को देश के दूसरे हिस्सों को रेल नेटवर्क से जोड़ने के साथ ही सामरिक दृष्टि से बेहद अहम है। परियोजना में 13 स्टेशन शामिल हैं।
ऋषिकेश के बीरभद्र और योगनगरी रेलवे स्टेशन से ट्रेनों का संचालन होता है। दो स्टेशन शिवपुरी और ब्यासी का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। बाकी स्टेशनों की टेंडर प्रक्रिया पूरी कर निर्माण शुरू करने की तैयारी है। ट्रैक बिछाने का काम भी शुरू कर दिया गया है।
ढालवाला से शिवपुरी तक की सुरंग की खोदाई अभी पूरी नहीं हो पाई है। यह सुरंग 10.8 किमी लंबी है। संसद की ओर से गठित रेलवे की स्थायी समिति ने आठ और नौ जून को ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना की समीक्षा की। समिति रेल मंत्रालय के कामकाज, बजट, योजनाओं और यात्री सुविधाओं की समीक्षा करती है।
अध्यक्ष डा. सीएम रमेश के साथ समिति में शामिल 20 सांसद परियोजना को देखने पहुंचे थे। धारी देवी तक उन्होंने सुरंग को देखा। इसके बाद समीक्षा में अब तक हुए कार्यों की प्रगति को जाना। आरवीएनएल की ओर से समिति को बताया गया कि जून 2028 तक ब्यासी तक ट्रेन का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। दिसंबर 2029 तक परियोजना के आखिरी स्टेशन कर्णप्रयाग तक ट्रेन पहुंचा दी जाएगी।
परियोजना में पांच जिले शामिल हैं
यह परियोजना गढ़वाल क्षेत्र को सुरक्षित, विश्वसनीय एवं हर मौसम में रेल संपर्क प्रदान करने के उद्देश्य से बनाई जा रही है। जिससे बार-बार भूस्खलन एवं प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित कमजोर सड़क नेटवर्क पर निर्भरता कम होगी। परियोजना में पांच जिले देहरादून, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग एवं चमोली शामिल हैं।
ऋषिकेश से कर्णप्रयाग ढाई घंटे में पहुंच जाएंगे
करीब 125 किमी की इस परियोजना की लगभग 104 किमी (83 प्रतिशत) लंबाई सुरंगों की है। जिसमें 16 मुख्य सुरंगें, 12 निकास सुरंगें। गहरी घाटियों और नदियों पर बने 19 प्रमुख और 31 छोटे पुल शामिल हैं।t’
परियोजना का सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन कर्णप्रयाग है। यहां 26 लाइन बिछाई जाएंगी। इसे टर्मिनस के रूप में विकसित किया जाएगा। परियोजना के पूरे होने पर ऋषिकेश से कर्णप्रयाग की यात्रा अवधि लगभग छह घंटे से घटकर लगभग 2.5 घंटे रह जाएगी। इससे पर्यटन एवं तीर्थाटन को बढ़ावा मिलेगा। लाजिस्टिक्स एवं व्यापार में सुधार होगा।
पहले दिसंबर 2028 था लक्ष्य
पहले ट्रेन को दिसंबर 2028 में कणप्रयाग तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था। परियोजना का कार्य तेजी से चल रहा है। विषम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण काम में कुछ दिक्कत भी आती है। निर्माण कार्य के लिए सामग्री पहुंचाने से लेकर मौसम संबंधी कई चुनौतियां रहती हैं। इस मार्ग पर कुल 13 रेलवे स्टेशन हैं।
इसमें बीरभद्र स्टेशन पुराना है, जिसमें भी योजना का कुछ काम हुआ है। इसके साथ ही योग नगरी ऋषिकेश से ट्रेनों का संचालन होता है। शिवपुरी, ब्यासी में काम शुरू हो गया है। बाकी स्टेशनों देवप्रयाग, जनासू, मलेथा, श्रीनगर, धारीदेवी, तिलानी, घोलतीर, गौचर एवं कर्णप्रयाग के टेंडर खुल चुके हैं।
योगनगरी से ब्यासी की दूरी 27.69 किलोमीटर
योगनगरी ऋषिकेश रेलवे स्टेशन से ब्यासी स्टेशन की दूरी 27.69 किलोमीटर है। ब्यासी से कर्णप्रयाग रेलवे स्टेशन की दूरी 92.60 किलोमीटर है। जबकि बीरभद्र से योगनगरी ऋषिकेश रेलवे स्टेशन की दूरी 5.7 किमी है। इसमें मार्च 2020 से ट्रेनों का संचालन शुरू हो गया था।
कार्य की स्थिति
16 में से 13 मुख्य सुरंगों की खोदाई पूर्ण (98 किमी, 95 प्रतिशत)
19 में से 8 प्रमुख रेल पुल पूर्ण, जिनमें अलकनंदा नदी पर ब्रिज-8 (3×90 मी) एवं ब्रिज-9 (15×30.5 मी कंपोजिट) शामिल
विद्युत एवं सिग्नलिंग कार्य अक्टूबर 2026 से प्रारंभ
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना में जून 2028 तक ब्यासी तक ट्रेन पहुंचाने का लक्ष्य है। परियोजना को दिसंबर 2029 में पूरा किया जाएगा। रेलवे की स्थायी संसदीय समिति ने परियोजना के बारे में यहां पहुंचकर जानकारी ली। – ओपी मालगुड़ी, उप महाप्रबंधक (सिविल), आरवीएनएल










