Uttarakhand News 22 June 2026: चारधाम यात्रा सीजन में उत्तरी हरिद्वार के गंगा घाट श्रद्धालुओं के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं।

दरअसल, हरकी पैड़ी क्षेत्र में भीड़ से बचने के लिए श्रद्धालु स्नान के लिए उत्तरी हरिद्वार का रुख कर रहे हैं। लेकिन वहां अधिकांश घाटों पर सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं और गंगा की मुख्य धारा होने के चलते पानी का बहाव और गहराई ज्यादा है।

कई श्रद्धालु चेतावनी बोर्ड लगे होने के बावजूद निर्धारित सीमाओं से आगे बढ़ जाते हैं। कुछ लोग सेल्फी लेने या रोमांच के लिए भी तेज बहाव वाले हिस्सों तक पहुंच जाते हैं, जिससे दुर्घटनाएं हो रही हैं।

जहां चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं, वहां भी कई श्रद्धालु उनकी अनदेखी करते दिखाई देते हैं। यही वजह है कि दो महीने के यात्रा सीजन में 10 से ज्यादा श्रद्धालु अपनी जान गंवा चुके हैं। महज एक सप्ताह के भीतर गुजरात व दिल्ली के दो श्रद्धालुओं सहित तीन लोगों की डूबने से मौत हुई है।

चारधाम यात्रा सीजन इस समय अपने चरम पर है। हरकी पैड़ी से लेकर मध्य हरिद्वार तक सभी गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ है। वीकेंड पर शनिवार और रविवार को श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भीड़ कई गुना बढ़ जाती है।

ऐसे में भीड़ से बचने के लिए दूसरे राज्यों के श्रद्धालु उत्तरी हरिद्वार के अलग-अलग घाटों पर स्नान के लिए पहुंचते हैं। हरकी पैड़ी सहित हरिद्वार के प्रमुख घाटों पर जल पुलिस के गोताखोर तैनात रहते हैं।

लेकिन उत्तरी हरिद्वार के गंगा घाटों पर न जल पुलिस तैनात है और न श्रद्धालुओं को खतरे वाली जगहों पर जाने से रोकने की कोई व्यवस्था है। कुछ घाटों पर चेतावनी बोर्ड जरूर लगे हैं। दूसरे राज्यों से आने वाले श्रद्धालु अक्सर ऐसे ही घाटों पर हादसों का शिकार हो रहे हैं।

कई बार टापू पर फंस चुके श्रद्धालु
गंगा का जल स्तर कम होने पर श्रद्धालुओं के दल अक्सर नदी पार कर टापू पर पहुंच जाते हैं। कई बार ऐसा हुआ है कि श्रद्धालुओं के टापू पर पहुंचने के बाद गंगा का जल स्तर बढ़ गया। श्रद्धालु टापू पर फंस गए। तब जल पुलिस और एसडीआरएफ की टीमों ने मशक्कत कर रेस्क्यू किया है।

कुल मिलाकर दूसरे राज्यों से आने वाले पर्यटक और श्रद्धालु स्थानीय परिस्थितियों से अनजान होने के कारण जोखिम का सही आकलन नहीं कर पाते।

इसके बावजूद वे स्नान के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर खतरे वाली जगहों पर पहुंच जाते हैं, जिससे हादसों की आशंका बढ़ जाती है। हादसों पर अंकुश लगाने के लिए संवेदनशील घाटों पर अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम किए जाने के साथ-साथ श्रद्धालु, पर्यटकों को जागरूक करने की आवश्यकता है।

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हाल ही में सामने आई प्रमुख घटनाएं
दूधियाबंद क्षेत्र में गाजियाबाद निवासी दो दोस्तों की डूबकर मौत।
चित्रकूट धाम घाट पर दिल्ली के 19 वर्षीय युवक की डूबकर मौत।
सूरत गुजरात का किशोर गंगा के भंवर में फंसकर डूबा, अगले दिन मिला शव।
दिल्ली के सुल्तानपुरी निवासी श्रद्धालु परिवार का नौ साल का बालक गंगा में डूबा।
सप्तऋषि क्षेत्र में राजस्थान का एक बुजुर्ग श्रद्धालु गंगा में डूबा।
गोकुलपुरी दिल्ली निवासी किशोर गंगा में डूबा, चार दिन बाद मिला शव।
श्रद्धालुओं से गहरे पानी में न उतरने और सुरक्षित घाटों पर ही स्नान करने की अपील लगातार की जा रही है। प्रमुख घाटों पर जल पुलिस और आपदा राहत दल भी तैनात हैं। कुछ श्रद्धालु व पर्यटक वीरान व असुरक्षित घाटों पर स्नान के लिए चले जाते हैं। ऐसे घाटों को चिह्नित कर चेतावनी बोर्ड भी लगाए गए हैं। हाल ही में सामने आई घटनाओं को देखते हुए पुलिसकर्मियों की तैनाती की जा रही है। श्रद्धालु और पर्यटकों को खुद भी यह समझना होगा कि जरा सी लापरवाही जान पर भारी पड़ सकती है, इसलिए सुरक्षित और अधिकृत घाटों पर ही स्नान करें।