Uttarakhand News 13 Aug 2026: हरिद्वार। उत्तर भारत में कांवड़ मेला आस्था की बड़ी यात्राओं में शामिल है। हरिद्वार-ऋषिकेश इस यात्रा के प्रमुख केंद्र हैं। इसमें हर वर्ष करोड़ों शिवभक्त गंगाजल लेकर अपने गंतव्यों की ओर लौटते हैं।

इस यात्रा में हर वर्ष शिव भक्तों की संख्या बढ़ती जा रही है। साथ ही अब इस यात्रा का स्वरूप भी तेजी से बदल रहा है। इस बदले स्वरूप ने पुलिस और प्रशासन की चिंताएं बढ़ा दी है।

इस बार 12 दिनों में करीब 4.80 करोड़ शिवभक्त हरिद्वार पहुंचे। परंतु, इस यात्रा के बदलते तौर-तरीकों ने नई चुनौतियां भी खड़ी कर दी हैं।

सड़क पर नियमों की अनदेखी

पारंपरिक, संयमित और पैदल कांवड़ के स्थान पर तेजी से बढ़ती डाक कांवड़, भारी कलश कांवड़, मोडिफाइड वाहन, तेज ध्वनि वाले डीजे, बिना साइलेंसर वाली बाइकों में बिना हेलमेट के कांवड़ यात्रियों की भीड़ और सड़क पर नियमों की अनदेखी अब पुलिस-प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनती जा रही है।

एक समय कांवड़ यात्रा का अर्थ था कि अनुशासित तरीके से कंधे पर सजी कांवड़, पैदल यात्रा, जय भोले, बोल बम का जयघोष। पिछले कुछ वर्षों से अब तस्वीर बदल रही है। शुरुआती दिनों में ही बड़े-बड़े कलश और ड्रम में गंगाजल ले जाने की प्रवृत्ति अधिक दिखाई दी। जिससे हाईवे पर यातायात भी प्रभावित हुआ।

कांवड़ मेले के अंतिम दिनों में डाक कांवड़ का दायरा इतना बढ़ा कि कई स्थानों पर हाईवे के दोनों ओर बाइक और अन्य वाहनों को खड़ा कर अस्थायी पार्किंग बना दी गई। हाईवे पर ही कांवड़ यात्रियों ने डेरा जमाए रखा। बिना साइलेंसर की बाइक, अत्यधिक माडिफाइड वाहन, तेज आवाज में डीजे, एक बाइक पर तीन से पांच सवारियां बिना हेलमेट की। ये दृश्य पूरी कांवड़ यात्रा में दिखा है।

मामूली टक्कर या विवाद की स्थिति में संयम खोने की घटनाएं भी सामने आई हैं। इसके अलावा फ्लाइओवर से रस्सी व तारों के सारे नीचे उतरना, बैरिकेटिंग तोड़ना, डिवाइडर को नियम विरुद्ध पार करना सहित आदि घटनाएं शामिल रही।

7000 मीट्रिक टन से अधिक कचरा

हरिद्वार : कांवड़ यात्रा में करोड़ों शिव भक्तों की आवाजाही के साथ प्लास्टिक, खाद्य पैकेजिंग, बोतल और अन्य कचरे का दबाव भी बढ़ रहा है। घाटों और मार्गों पर स्वच्छता व्यवस्था के लिए अतिरिक्त संसाधन लगाने पड़ रहे हैं।

हरकी पैड़ी सहित आसपास घाटों पर सिंगल यूज प्लास्टिक को भी प्रशासन नियंत्रित नहीं कर पाया। जिससे गंदगी और अधिक फैली है। इस बार 7000 मीट्रिक टन से अधिक कचरा कांवड़ यात्रियों ने हरिद्वार शहर क्षेत्र में छोड़ा है।
अब राज्यों को मिलकर बनानी होगी नीति

हरिद्वार : बढ़ते स्वरूप को देखते हुए उत्तराखंड के साथ हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली सरकार को अभी से साझा नीति तैयार करनी होगी। डाक कांवड़ वाहनों की संख्या, वाहन का स्वरूप, डीजे की ध्वनि सीमा, सवारियों की संख्या, हेलमेट, बिना साइलेंसर की बाइकों पर प्रतिबंध, पार्किंग व्यवस्था, रूट और गति सीमा को लेकर स्पष्ट नियम हों। संबंधित राज्यों में प्रवेश से पहले ही यात्रियों को इनकी जानकारी दी जाए। जिस राज्य से कांवड़ लेने के लिए शिव भक्त हरिद्वार आ रहे हैं उस राज्य शहर से नियम लागू हों।

डीजे, हुडदंग, बिना साइलेंसर के वाहनों को काफी नियंत्रित करने का प्रयास किया गया है। आने वाली कांवड़ यात्राओं में और अधिक नियमों का पालन हो और कुछ व्यवस्थागत, अनुशानात्मक सुधार के लिए विस्तृत सुझाव की रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। – मयूर दीक्षित, जिलाधिकारी हरिद्वार

कांवड़ यात्रा में आस्था के साथ अनुशासन भी जरूरी है। यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर पुलिस लगातार कार्रवाई की है। भविष्य में डाक कांवड़ और वाहनों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अंतरराज्यीय समन्वय के साथ यातायात और सुरक्षा की रणनीति को और प्रभावी बनाया जाएगा।