Uttarakhand News 22 Aug 2026: उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों से पेंशन या ग्रेच्युटी की राशि से की जाने वाली रिकवरी को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की पीठ ने लोक निर्माण विभाग तथा राज्य सरकार द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उत्तराखंड लोक सेवा ट्रिब्यूनल के आदेश को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सेवानिवृत्ति के बाद वेतन निर्धारण में हुई कथित पुरानी त्रुटियों के आधार पर कर्मचारी की ग्रेच्युटी से राशि काटना पूरी तरह से अनुचित और नियम विरुद्ध है।

मामले के अनुसार, लोक निर्माण विभाग, देहरादून (यमुना कॉलोनी) के जोनल कार्यालय से 31 मई 2023 को सहायक अभियंता के पद से सेवानिवृत्त हुए पद्मेंद्र सिंह बर्तवाल के मामले में विभाग ने उनके रिटायरमेंट के बाद, 26 जुलाई 2023 को एक आदेश जारी किया। विभाग ने दावा किया कि 30 अगस्त 1990 (शुरुआती नियुक्ति की तिथि) से उनके वेतन का गलत निर्धारण हुआ था। इसके तहत विभाग ने उनकी ग्रेच्युटी की राशि से 10,33,827 रुपये काट लिए और केवल 9,66,173 रुपये का भुगतान किया। इस कटौती के खिलाफ पूर्व कर्मचारी ने लोक सेवा ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाया, जिसने कर्मचारी के पक्ष में फैसला सुनाया था।

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने ट्रिब्यूनल के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट के प्रसिद्ध ””रफीक मसीह”” फैसले के तहत आता है। सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुसार, सेवानिवृत्त कर्मचारियों से या 5 वर्ष से अधिक पुराने मामलों में की गई रिकवरी पूरी तरह से असंवैधानिक और कठोर मानी जाती है। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की याचिका में कोई मेरिट न पाते हुए उसे खारिज कर दिया और ट्रिब्यूनल के आदेश को बरकरार रखा, जिसके तहत विभाग को रोकी गई ग्रेच्युटी और अन्य बकाये पर 1 सितंबर 2023 से वास्तविक भुगतान की तिथि तक ब्याज देने का निर्देश दिया गया है।