Uttarakhand News 29 Aug 2026: बिहार और यूपी से आए 60 यात्रियों का जत्था, शुक्रवार को नीलकंठ महादेव के दर्शन कर बेहद प्रसन्न था। लेकिन किसको पता था कि बस से लौटे हुए महज एक किलोमीटर की दूरी पर यह उल्लास गम में बदल जाएगा। घायलों को ले जाती एंबुलेस का सायरन मानो यात्रियों की सांसें अटका रहा था।
बस की चपेट में आए स्कूटी सवार दो स्थानीय युवा का जीवन एक झटके में खत्म हो गया। एंबुलेंस मृतक को लेकर अस्पताल में पहुंची तो मृतक की बहन जोर जोर से बिलख उठी। बोली, मेरे भाई की क्या गलती थी। उसे हमसे अचानक क्यों छीन लिया।
मृतक के स्वजनों को बिलखते हुए देख हर तरफ मातम का मंजर नजर आया। घायल बस यात्री भी बिलखते स्वजनों को देख अपनी आंखों में आंसू आने से रोक न सके।
वहीं, अस्पताल में परिवार के साथ बैठा घायल यात्री राम दुलवन भी हादसे से सदमे में था और उनकी सकुशल होने को भगवान नीलकंठ महादेव की कृपा मान रहा था। हर यात्री इस हादसे से सहमा था और दो मौत की घटना से व्यथित भी था।
बिजली की गड़गड़ाहट और अंधेरे के बीच अटकी रहीं सांसें
हादसे के वक्त मौसम अत्याधिक खराब और वन क्षेत्र होने के कारण अधिक अंधेरा होने से बस में सवार यात्रियों की सांसें काफी देर तक अटकी रहीं। हर तरफ चीख पुकार मची रही। बिजली की गड़गड़ाहट और वर्षा के बीच घायल यात्री जीवन के लिए जूझते रहे। पुलिस और एसडीआरएफ के जवानों को घटना स्थल पर पहुंचते देख तो लोगों की हिम्मत बंधी।
छह महीने में छह घटनाएं, संवेदनशील है क्षेत्र
दरअसल, भद्रकाली से लेकर ब्रह्मानंद मोड़ तक का यह मार्ग दुर्घटना की दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता रहा है। 3 महीने पहले खारास्रोत पार्किंग से महज 100 मीटर की दूरी पर एक तेज रफ्तार डंपर सड़क ने नीचे एक घर की छत पर जा गिरा था, जिसमें एक महिला की मौत हो गई थी। इससे पहले भी इस क्षेत्र में बस, ट्रैक्टर-ट्रॉली या यात्री वाहन पलटने या दुर्घटनाग्रस्त होने की अनेक घटनाएं हो चुक हैं, जिसमें कई लोग घायल भी हो चुके हैं।
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जाहिर है कि हादसे रोकने के लिए पुलिस, प्रशासन, परिवहन, एनएच समेत अन्य विभागों को सुरक्षात्मक कदम उठाने होंगे। वहीं, डम्पर हादसे में वाहन के वैध दस्तावेज न होने के बावजूद क्षेत्र में अवैध वाहनों के संचालन को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो चुके हैं।










