Uttarakhand News 7 July 2026: उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने अभियोजन निदेशक के पद पर हुई पुलिस अधिकारी की नियुक्ति को चुनौती देनी वाली याचिका पर सुनवाई के बाद राज्य सरकार से पूछा है कि उनके द्वारा अभियोजन निदेशक पद के लिए क्या नियम बनाए गए हैं। कोर्ट ने इस पर एक माह के भीतर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि पूर्व में कोर्ट ने इस पर राज्य सरकार से स्थिति से अवगत कराने को कहा था लेकिन अभी तक राज्य सरकार की ओर से कोई जवाब नही आया।मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार केशर सिंह चौहान ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अभियोजन निदेशक के पद पर हुई पुलिस अधिकारी की नियुक्ति को चुनौती देते हुए कहा था कि राज्य को बने 26 साल होने को हैं। लेकिन अभी तक अभियोजन निदेशक के पद पर पुलिस अधिकारियों की ही नियुक्ति होती आई है, जो कि भारतीय न्याय सहिंता की धारा 20 का उल्लंघन है।
न्याय सहिंता की धारा में प्रावधान है कि अभियोजन निदेशक के पद पर सेवानिवृत्त सेशन जज या ऐसे अधिवक्ता जिनकी वकालत 15 साल हो चुकी हो उन्हें अभियोजन निदेशक के पद पर नियुक्त किया जा सकता है। लेकिन अभी तक इस पद पर पुलिस अधिकारी की ही नियुक्ति करना सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का भी उल्लंघन है। याचिका में कहा कि जांच स्वतंत्र हो इसलिए इस विभाग को पुलिस से अलग रखा गया है। अब यहां पुलिस अधिकारी ही जांच के पद को संभाले हुए है तो जांच प्रभावित हो सकती है। याचिका में कोर्ट से प्रार्थना की गई
कि अभियोजन निदेशक के पद पर सेवानिवृत्त सेशन जज या ऐसे अधिवक्ता की नियुक्ति की जाए जिसकी वकालत 15 साल की हो चुकी हो और वह भारतीय न्याय सहिंता की धारा 20 में दिये गए प्रावधानों को पूर्ण करता हो।










