Uttarakhand News 25 June 2026: अग्निकांड के लिहाज से बेहद संवेदनशील शहर में आग से बचाव के इंतजाम नाकाफी हैं। शहर के अधिकांश पुराने भवनों में जर्जर हो चुकी बिजली लाइनें अग्निकांड का खतरा बढ़ा रही हैं, तो बाजार व आबादी क्षेत्रों में झूलते तार हादसों को न्योता दे रहे हैं।
अतिक्रमण की जद में आकर कई हाइड्रेंट जमींदोज हो चुके हैं। साथ ही हाइड्रेंट स्थापित कर 24 घंटे पानी देने की योजना अब भी अधर में लटकी हुई है। ऐसे में यदि आबादी क्षेत्र के बीच आग लग जाए, तो काबू पाना चुनौती से कम नहीं है।
117 पुराने व लकड़ी के भवन चिह्नित
ब्रिटिशकाल में बसे शहर के कई ऐतिहासिक भवन आज भी पुरानी यादें ताजा करते हैं, लेकिन इन भवनों में आग की रोकथाम को लेकर पर्याप्त इंतजाम मौजूद नहीं है। अधिकांश भवनों में बिजली की वायरिंग वर्षों पुरानी है, जिस कारण बीते एक दशक में शाट-सर्किट की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन विभागीय स्तर पर इन पुराने भवनों का व्यापक स्तर पर कोई विद्युत सुरक्षा आडिट नहीं कराया गया।
हालांकि दमकल विभाग ने बीती घटनाओं से सबक लेते हुए मल्लीताल बाजार क्षेत्र में 117 पुराने व लकड़ी के भवन चिह्नित कर स्वामियों को नोटिस तो जारी किये, लेकिन नोटिस जारी करने के बाद इन भवनों में सुरक्षा के इंतजाम किये गए अथवा नहीं यह जांच नहीं की गई।
खपत बढ़ी, लेकिन कनेक्शनों में नहीं हुए बदलाव
शहर में समय के साथ लोगों की जरूरत व बिजली की खपत तो बढ़ी, लेकिन उपभोक्ताओं ने विद्युत कनेक्शन के लोड को नहीं बढ़ाया। जिस कारण पुरानी लाइनों पर लोड बढ़ने पर उनके जलकर शाट- सर्किट की आशंका बनी रहती है।
ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता एसपी सहगल ने बताया कि व्यावसायिक इकाइयों में तो उपभोक्ता द्वारा खपत बढ़ने पर बदलाव कर लिया जाता है, लेकिन घरेलू कनेक्शन सामान्यत: एक से दो किलोवाट के हैं। हीटर, गीजर व अन्य उपकरणों के चलने से लाइनों पर लोड अधिक रहता है।
झूलते तार दे रहे हादसों को न्योता
शहर के मल्लीताल बड़ा बाजार, जयलाल साह बाजार, तल्लीताल बाजार शहर के सबसे पुराने भवनों वाला क्षेत्र है। बिजली पोलों पर लटके तार हवा के झोंके से भवनों से भी टकराते है। ईई एसपी सहगल ने बताया कि पोलों पर टेलीकाम व केबल के तार हटाने को संबंधित कंपनी व संचालकों को नोटिस जारी किये गए है।
फायर हाइड्रेंट स्थापित करने की योजना अधर में
शहर में ब्रिटिशकाल के दौरान 83 फायर हाइड्रेंट स्थापित किये गए थे, लेकिन बीते दिसंबर में जल संस्थान व अग्निशमन विभाग के संयुक्त सर्वे में 75 हाइड्रेंट का ही रिकार्ड पाया गया। इनमें से 47 हाइड्रेंट ही क्रियाशील मिले। जल संस्थान ने बंद पड़े व जमींदोज हो चुके 17 हाइड्रेंट सुचारु करवा दिये हैं। ये हाइड्रेंट बाजार व मुख्य मार्गों के आसपास तक ही सीमित है।
जबकि बीते कुछ दशकों में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में आबादी बढ़ने के साथ ही रास्ते व गलियां संकरी होने के कारण यहां भी फायर हाइड्रेंट की जरूरत महसूस होने लगी है। जल संस्थान ने अग्निशमन विभाग के साथ संयुक्त सर्वे कर नये फायर हाइड्रेंट स्थापित करने को स्थलों का चयन कर लाइनों में 24 घंटे पानी उपलब्ध कराने का प्रोजेक्ट बनाने का दावा तो किया, लेकिन कई माह बीतने के बाद भी यह प्रोजेक्ट तैयार नहीं हो सका है।










