Uttarakhand News 23 Sep 2026: देहरादून। प्रदेश में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले विभिन्न एजेंसियों के सर्वे में भाजपा को भारी बहुमत के साथ बढ़त लेते दिखाया जा रहा है। इससे देवभूमि का राजनीतिक तापमान बढ़ गया है।

राजनीतिक दलों की चुनाव को लेकर चल रही तैयारियों के बीच न्यूज लीडर-मैट्रिज के ओपिनियन पोल में भाजपा को कुल 70 में से 47 सीट दी गई हैं, जबकि कांग्रेस को 22 एवं बसपा को एक सीट मिलने का अनुमान व्यक्त किया गया है। 10 दिन के भीतर यह दूसरा ओपिनियन पोल ने भाजपा को दो तिहाई से अधिक सीट दी हैं। इसने धामी सरकार का मनोबल बढ़ा दिया है।

भाजपा को भारी बहुमत मिलने का अनुमान
ओपिनियन पोल में प्रदेश में भाजपा को भारी बहुमत मिलने का अनुमान व्यक्त किया गया है। विधानसभा की कुल 70 सीट में से बहुमत के लिए 36 सीट आवश्यक हैं। पिछले दो विधानसभा चुनाव में भाजपा ने प्रचंड बहुमत से जीत दर्ज कर चुकी है।

लगातार तीसरे विधानसभा चुनाव में जीत की हैटट्रिक के लिए धामी सरकार और प्रदेश संगठन सतर्कता के साथ आगे बढ़ रहा है। ऐसे में ओपिनियन पोल में सत्ताधारी दल को मिल रही बढ़त ने राजनीतिक विमर्श को भी नई दिशा दे दी है।

विपक्ष भाजपा सरकार के विरुद्ध एंटी इनकंबेंसी को हवा देने का प्रयास कर रहा है। वहीं ओपिनियन पोल प्रो इनकंबेंसी की इबारत लिख रहे हैं।

विकास और सांस्कृतिक पहचान के एजेंडे को जन समर्थन
दरअसल, धामी सरकार ने ऐसे कई फैसले लिए हैं, जो उत्तराखंड की राजनीति में लगातार चर्चा में रहे हैं। समान नागरिक संहिता, नकल विरोधी कानून, महिलाओं को सरकारी नौकरियों में क्षैतिज आरक्षण, भू-कानून से जुड़े कदम और देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने की पहल सरकार के प्रमुख निर्णयों में शामिल रहे हैं।

इन निर्णयों का महत्व केवल सरकारी घोषणाओं तक सीमित नहीं है। इनके जरिए सरकार ने सुशासन, पारदर्शिता, महिला सशक्तीकरण और उत्तराखंड की विशिष्ट पहचान से जुड़े मुद्दों को अपनी नीतियों के केंद्र में रखा है। साथ ही विकास का एजेंडा केवल सड़क, बिजली और बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं रहा।

चारधाम और मानसखंड क्षेत्र के धार्मिक स्थलों का विकास, पर्यटन सुविधाओं का विस्तार, कनेक्टिविटी में सुधार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने के प्रयास भी सरकार की प्राथमिकताओं में रहे हैं।

धामी सरकार का राजनीतिक नैरेटिव विकास और उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान पर रहा है। हालिया सर्वेक्षणों में इस पर मुहर लग रही है।

अब विमर्श के केंद्र में धामी सरकार का कामकाज
उत्तराखंड की राजनीति में मुख्यमंत्री का चेहरा हमेशा महत्वपूर्ण रहा है। ऐसे में वर्ष 2027 की लड़ाई को केवल भाजपा बनाम कांग्रेस के रूप में देखना तस्वीर का एक हिस्सा होगा। यह चुनाव सरकार के कामकाज और मुख्यमंत्री के नेतृत्व के प्रति जनता की धारणा की परीक्षा भी होगा।

अगस्त, 2026 के एक इंडिया टुडे-सीवोटर सर्वे में पुष्कर सिंह धामी को 28.2 प्रतिशत समर्थन के साथ मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे पसंदीदा चेहरा बताया गया था। उसी सर्वे में भाजपा की वोटिंग इंटेंशन कांग्रेस से आगे बताई गई थी।

वहीं इसी माह के पहले पखवाड़े में टाइम्स नाउ भारत के एक अन्य सर्वे ने भाजपा को 54 और कांग्रेस को 14 सीटों का अनुमान जताया गया। इन सर्वेक्षणों से यह तस्वीर भी साफ हुई है कि मुख्यमंत्री धामी सरकार का कामकाज अब विमर्श के केंद्र में है।