Uttarakhand News 23 Oct 2026: कुमाऊं की उद्योग नगरी ऊधम सिंह नगर और पर्यटन नगरी नैनीताल इन दिनों साइबर अपराधियों के निशाने पर हैं, जिससे दोनों ही जिले आनलाइन ठगी के बड़े केंद्र बनते जा रहे हैं। पुलिस के ताजा आंकड़ों के अनुसार औद्योगिक हब ऊधम सिंह नगर में इस साल अब तक 335 प्राथमिकी दर्ज हो चुकी हैं और साइबर ठगी की इस जांच के तार देश के 18 राज्यों तक फैल चुके हैं।

वहीं, पर्यटकों से गुलजार रहने वाले नैनीताल जिले में साल 2025 से सितंबर 2026 तक 4,396 साइबर शिकायतें सामने आई हैं, जिनमें आम जनता को 10.55 करोड़ रुपये से अधिक का चूना लगाया गया है। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि नैनीताल जिले में बीते 17 अक्टूबर को एक ही दिन में रिकार्ड 43 प्राथमिकी दर्ज की गईं, जिनमें अकेले हल्द्वानी और मुखानी क्षेत्र के 25 मामले शामिल हैं।

ऊधम सिंह नगर में बढ़ीं प्राथमिकी
पुलिस के अनुसार, ऊधम सिंह नगर में वर्ष 2015 में साइबर अपराध की पहली प्राथमिकी दर्ज हुई थी। वर्ष 2021 में 85, 2022 में 142, 2023 में 193 और 2024 में 246 प्राथमिकी दर्ज हुईं। वर्ष 2025 में 151, जबकि 2026 में अब तक 335 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। गिरफ्तारियां वर्ष 2023 में छह, 2024 में दो, 2025 में 15 और इस साल अब तक 46 हुई हैं। जांच में आंध्र प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, केरल, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, नगालैंड, ओडिशा, पंजाब, तमिलनाडु और छत्तीसगढ़ से जुड़े तार सामने आए हैं।

दूसरे राज्यों की ठगी की रकम हल्द्वानी से निकली
छत्तीसगढ़ में 26.78 लाख रुपये की ठगी के मामले में मुखानी के एटीएम से 60 हजार रुपये निकाले गए। पश्चिम बंगाल में 19.67 लाख रुपये की ठगी के मामले में हल्द्वानी से 20 हजार और तमिलनाडु में 3.99 लाख रुपये की ठगी के मामले में यहां से 40 हजार रुपये निकाले जाने की जानकारी मिली है।

नैनीताल में 10.55 करोड़ की ठगी की सूचना
नैनीताल जिले में 16 सितंबर 2026 तक राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर 2,388 शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें 10 करोड़ 55 लाख 90 हजार 814 रुपये की क्षति बताई गई। पुलिस ने 2 करोड़ 29 लाख 31 हजार 147 रुपये होल्ड कराए और 11 लाख 23 हजार 179 रुपये वापस दिलाए।

यूपीआई से जुड़ी 1,898 शिकायतें सबसे अधिक रहीं। 17 अक्टूबर को दर्ज 43 प्राथमिकी में हल्द्वानी कोतवाली में 15, मुखानी में 10, रामनगर में आठ, मल्लीताल में चार, तल्लीताल और लालकुआं में दो-दो तथा कालाढूंगी और भवाली में एक-एक प्राथमिकी दर्ज हुई। पुलिस के अनुसार, सबसे अधिक मामले किराये पर बैंक खाते देने और दूसरे नंबर पर एटीएम से संदिग्ध लेनदेन के हैं।

कुमाऊं में 345 गिरफ्तारियां
पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, कुमाऊं में वर्ष 2021 में 859 शिकायतें और 119 प्राथमिकी दर्ज हुईं। वर्ष 2022 में 514 शिकायतों पर 50, 2023 में 645 शिकायतों पर 58 और 2024 में 456 शिकायतों पर 103 प्राथमिकी दर्ज की गईं। इन वर्षों में क्रमशः नौ, 38, 18 और 73 गिरफ्तारियां हुईं। वर्ष 2025 और 2026 के संयुक्त आंकड़ों में कुमाऊं के छह जिलों में 12,341 शिकायतें मिलीं और करीब 960 प्राथमिकी दर्ज हुईं। इस अवधि में 345 गिरफ्तारियां की गईं। साइबर ठगी की सबसे अधिक शिकायतें ऊधम सिंह नगर में आईं। इसके बाद नैनीताल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, चंपावत और बागेश्वर का स्थान है।

साइबर अपराध के मामलों को लेकर पुलिस सख्त है, सभी जिलों को शिकायतों के आधार पर प्राथमिकी पंजीकृत कर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। साथ ही साइबर के प्रति जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं, ताकि लोग ठगी से बच सके।

Uttarakhand News 23 Oct 2026: कुमाऊं की उद्योग नगरी ऊधम सिंह नगर और पर्यटन नगरी नैनीताल इन दिनों साइबर अपराधियों के निशाने पर हैं, जिससे दोनों ही जिले आनलाइन ठगी के बड़े केंद्र बनते जा रहे हैं। पुलिस के ताजा आंकड़ों के अनुसार औद्योगिक हब ऊधम सिंह नगर में इस साल अब तक 335 प्राथमिकी दर्ज हो चुकी हैं और साइबर ठगी की इस जांच के तार देश के 18 राज्यों तक फैल चुके हैं।

वहीं, पर्यटकों से गुलजार रहने वाले नैनीताल जिले में साल 2025 से सितंबर 2026 तक 4,396 साइबर शिकायतें सामने आई हैं, जिनमें आम जनता को 10.55 करोड़ रुपये से अधिक का चूना लगाया गया है। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि नैनीताल जिले में बीते 17 अक्टूबर को एक ही दिन में रिकार्ड 43 प्राथमिकी दर्ज की गईं, जिनमें अकेले हल्द्वानी और मुखानी क्षेत्र के 25 मामले शामिल हैं।

ऊधम सिंह नगर में बढ़ीं प्राथमिकी
पुलिस के अनुसार, ऊधम सिंह नगर में वर्ष 2015 में साइबर अपराध की पहली प्राथमिकी दर्ज हुई थी। वर्ष 2021 में 85, 2022 में 142, 2023 में 193 और 2024 में 246 प्राथमिकी दर्ज हुईं। वर्ष 2025 में 151, जबकि 2026 में अब तक 335 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। गिरफ्तारियां वर्ष 2023 में छह, 2024 में दो, 2025 में 15 और इस साल अब तक 46 हुई हैं। जांच में आंध्र प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, केरल, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, नगालैंड, ओडिशा, पंजाब, तमिलनाडु और छत्तीसगढ़ से जुड़े तार सामने आए हैं।

दूसरे राज्यों की ठगी की रकम हल्द्वानी से निकली
छत्तीसगढ़ में 26.78 लाख रुपये की ठगी के मामले में मुखानी के एटीएम से 60 हजार रुपये निकाले गए। पश्चिम बंगाल में 19.67 लाख रुपये की ठगी के मामले में हल्द्वानी से 20 हजार और तमिलनाडु में 3.99 लाख रुपये की ठगी के मामले में यहां से 40 हजार रुपये निकाले जाने की जानकारी मिली है।

नैनीताल में 10.55 करोड़ की ठगी की सूचना
नैनीताल जिले में 16 सितंबर 2026 तक राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर 2,388 शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें 10 करोड़ 55 लाख 90 हजार 814 रुपये की क्षति बताई गई। पुलिस ने 2 करोड़ 29 लाख 31 हजार 147 रुपये होल्ड कराए और 11 लाख 23 हजार 179 रुपये वापस दिलाए।

यूपीआई से जुड़ी 1,898 शिकायतें सबसे अधिक रहीं। 17 अक्टूबर को दर्ज 43 प्राथमिकी में हल्द्वानी कोतवाली में 15, मुखानी में 10, रामनगर में आठ, मल्लीताल में चार, तल्लीताल और लालकुआं में दो-दो तथा कालाढूंगी और भवाली में एक-एक प्राथमिकी दर्ज हुई। पुलिस के अनुसार, सबसे अधिक मामले किराये पर बैंक खाते देने और दूसरे नंबर पर एटीएम से संदिग्ध लेनदेन के हैं।

कुमाऊं में 345 गिरफ्तारियां
पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, कुमाऊं में वर्ष 2021 में 859 शिकायतें और 119 प्राथमिकी दर्ज हुईं। वर्ष 2022 में 514 शिकायतों पर 50, 2023 में 645 शिकायतों पर 58 और 2024 में 456 शिकायतों पर 103 प्राथमिकी दर्ज की गईं। इन वर्षों में क्रमशः नौ, 38, 18 और 73 गिरफ्तारियां हुईं। वर्ष 2025 और 2026 के संयुक्त आंकड़ों में कुमाऊं के छह जिलों में 12,341 शिकायतें मिलीं और करीब 960 प्राथमिकी दर्ज हुईं। इस अवधि में 345 गिरफ्तारियां की गईं। साइबर ठगी की सबसे अधिक शिकायतें ऊधम सिंह नगर में आईं। इसके बाद नैनीताल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, चंपावत और बागेश्वर का स्थान है।

साइबर अपराध के मामलों को लेकर पुलिस सख्त है, सभी जिलों को शिकायतों के आधार पर प्राथमिकी पंजीकृत कर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। साथ ही साइबर के प्रति जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं, ताकि लोग ठगी से बच सके।