Uttarakhand News 6 June 2026: हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल के चिकित्सक पर महिला ने आठ साल की बेटी का गलत इलाज करने का आरोप लगाया है। इस कारण बच्ची की जान खतरे में है। इस इलाज में सात से आठ लाख रुपये खर्च हो चुके हैं लेकिन बेटी अभी भी पूरी तरह स्वस्थ नहीं है।

रामनगर निवासी कंचन ने बताया कि उसकी बेटी ने पांच रुपये का सिक्का निगल लिया था। 13 मई को बेटी को रामनगर के अस्पताल से सुशीला तिवारी अस्पताल (एसटीएच) रेफर किया गया। रात नौ बजे वह यहां पहुंची तो ईएनटी विभाग के डॉक्टर ने मरीज को अगले दिन देखने की बात कही। अगले दिन सिक्का तो निकाल लिया गया लेकिन बेटी की तबीयत में सुधार नहीं हुआ।

कंचन का कहना है कि उन्होंने 15 मई को डॉक्टर को बताया कि बेटी को बुखार और दर्द है। जांच में पता चला कि आहार नली में सूजन और फेफड़ों में पानी भर गया है। डॉक्टर ने यह नहीं बताया कि यह कैसे हुआ।

कंचन का कहना है कि इस दौरान उनकी बेटी को आईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया। वहां भी जब तबीयत ठीक नहीं हुई तो बेटी को उसी रात 10.30 बजे दिल्ली या बरेली दिखाने की बात कहकर डिस्चार्ज कर दिया। वह बेटी को लेकिन देर रात दो बजे बरेली के राममूर्ति अस्पताल पहुंची। वहां के डॉक्टरों ने जांच कर बताया कि बेटी की भोजन नली में कट लग गया है जिसकी वजह से इंफेक्शन हो गया है।

अस्पताल प्रबंधन ने लखनऊ से सर्जन बुलाया और फेफड़ों की सर्जरी हुई। महिला का आरोप है कि एसटीएच में यदि पहले ही सही से इलाज हो जाता तो उनकी बेटी की यह हालत नहीं होती। ईएनटी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. शहजाद का कहना है कि वह उस दिन अवकाश में थे। ऐसे में उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।

मामला जानकारी में नहीं है लेकिन यह गंभीर प्रकरण है। अगर लिखित शिकायत मिलती है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी होगी।