Uttarakhand News 12 Oct 2026: देहरादून प्रेमनगर क्षेत्र के बिधोली गांव में साइबर ठगी का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक दंपती को एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (एटीएस) और मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बनकर फोन करने वाले साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 45.85 लाख रुपये ठग लिए।

आरोपियों ने दंपती को उनके मोबाइल नंबर का आतंकी हमले में इस्तेमाल होने और जांच में फंसने का डर दिखाया। इतना ही नहीं, उनके तीनों बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी धमकाया। इसके बाद जांच के नाम पर आरबीआई के खाते में रकम जमा कराने को कहा। पीड़ितों ने 21 से 27 अगस्त के बीच पांच बार में रकम ट्रांसफर कर दी। पुलिस से आठ अक्तूबर को की गई शिकायत में दंपती ने रकम वापस दिलाने और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

60 घंटे तक वीडियो कॉल पर रखा
शिकायत के अनुसार, विजयपाल धीमान और उनकी पत्नी पुष्पा धीमान को 16 अगस्त के आसपास अज्ञात लोगों के फोन आने शुरू हुए। फोन करने वालों ने खुद को मुंबई स्थित एटीएस मुख्यालय और क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया। इनमें एक ने अपना नाम सब इंस्पेक्टर रंजीत कुमार बताया। आरोपियों ने कहा कि उनके मोबाइल नंबर का इस्तेमाल आतंकी हमले में हुआ है और वे जांच के दायरे में हैं। इसके बाद दंपती को डराकर उनके तीनों बच्चों के बारे में जानकारी ली गई और उनकी जान को खतरा होने की बात कही गई। आरोपियों ने दंपती को लगातार फोन और व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर संपर्क में रखा। शिकायत के मुताबिक, उन्हें किसी से बात नहीं करने दी गई। अंतिम दौर में एक वीडियो कॉल करीब 60 घंटे तक जुड़ी रही। डर के कारण दंपती ने किसी को इसकी जानकारी नहीं दी और आरोपियों के निर्देश पर रकम जमा करते रहे।

चार बार आरटीजीएस, एक बार नकद जमा
शिकायत में बताया गया है कि दंपती ने अलग-अलग बैंक खातों से चार बार आरटीजीएस के जरिये और एक बार बैंक शाखा में नकद जमा कर कुल 45.85 लाख रुपये दिए। इसमें 15 लाख रुपये सनातन ट्रेडर्स, 11.35 लाख रुपये प्रागज्योतिष एंटरप्राइजेज, 11.50 लाख रुपये इंटीमेटेक्स प्राइवेट लिमिटेड, पांच लाख रुपये शांबा मुराम और तीन लाख रुपये आदित्य संदीप महाराज के नाम से जुड़े खातों में जमा किए गए। बाद में आरोपियों ने जमीन बेचकर और रकम देने का दबाव भी बनाया।

बेटी ने देखा तो काटी कॉल
तीन अक्तूबर को दंपती की बेटी अचानक घर पहुंची। उसने माता-पिता को लंबे समय से वीडियो कॉल पर बात करते देखा तो पूछताछ की। इस पर दंपती घबरा गए और कॉल काट दी। इसके बाद से आरोपियों का फोन नहीं आया। शिकायत में पीड़ितों ने संबंधित बैंक खातों को फ्रीज करने, लेनदेन की जांच करने और आरोपियों की पहचान कर रकम वापस दिलाने की मांग की है।