Uttarakhand News 02 May 2026: प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू होने के बाद वसीयत से जुड़े मामलों की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन किए जाने से अब कुछ व्यावहारिक समस्याएं सामने आ रही हैं।

कुछ प्रकरणों में वसीयत पंजीकरण में काफी लग रहा है वहीं, इसमें वकीलों की भूमिका नगण्य हो रही है। इससे वसीयत की विधिक भाषा का उपयोग कम होने से भविष्य में वसीयतनामा करने वालों व उत्तराधिकारियों के सामने समस्याएं आने की आशंका व्यक्त की जा रही है। इसे देखते हुए अब जल्द ही गृह विभाग, बार काउंसिल के पदाधिकारियों के साथ इस विषय पर बैठक करेगा।

प्रदेश में 27 जनवरी 2025 से समान नागरिक संहिता कानून लागू हो चुका है। इसके तहत अब विवाह पंजीकरण, लिव इन, विवाह-विच्छेद व वसीयत आदि के मामले ऑनलाइन पंजीकृत किए जा रहे हैं। इससे निश्चित रूप से इन कार्यों में पारदर्शिता आई है।

इस समय एक बड़ी समस्या वसीयत के मामलों को लेकर उठाई गई है। समान नागरिक संहिता में वसीयत के पंजीकरण कामन सर्विस सेंटर (सीएससी) के माध्यम से किए जा रहे हैं। इसमें वसीयत करने वालों के हाथों की अंगुलियों के निशान लिए जाते हैं। साथ ही गवाहों के बयान के वीडियो भी बनाए जाते हैं।

वहीं, इसके लिए आधार कार्ड से जुड़े मोबाइल फोन का नंबर भी अपने पास होना जरूरी होता है, इसमें ही ओटीपी आता है। इसी आधार पर वसीयत के पंजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। वहीं, पहले केवल वसीयत कराने वाले, अपने अधिवक्ता के साथ सीधा रजिस्ट्रार के समक्ष जाते थे, जहां वसीयत का पंजीकरण हो जाता था।

अधिवक्ताओं की भूमिका तकरीबन समाप्त
कुछ समय पहले शासन में अधिवक्ताओं ने यूसीसी के तहत पंजीकरण प्रक्रिया में समय लगने और वसीयत में विधिक भाषा का अभाव होने के संबंध में अपना पक्ष रखते हुए इस प्रक्रिया को ऑफलाइन करने का भी सुझाव दिया था। अधिवक्ता शिवा वर्मा का कहना है कि यूसीसी पोर्टल की साइट में समस्याएं आ रही हैं, इसमें अधिवक्ताओं की भूमिका तकरीबन समाप्त हो गई है।

वहीं, पोर्टल पर दस्तावेज अपलोड करने, सत्यापन प्रक्रिया पूरी करने और कई बार सर्वर की धीमी गति के कारण कार्य प्रभावित हो रहा है।

ऐसे में जरूरी है कि इसकी ऑफलाइन प्रक्रिया भी जारी रखी जाए। सचिव गृह शैलेश बगौली ने कहा कि इस संबंध में शासन को प्रत्यावेदन मिला है। इस पर जल्द ही बार काउंसिल के साथ बैठक कर उचित समाधान निकाला जाएगा।