Uttarakhand News 23 Sep 2026: देहरादून। एमबीबीएस दाखिले के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, उसका नेटवर्क उतना ही बड़ा सामने आ रहा है। पुलिस की अब तक की पड़ताल में गिरोह का संचालन किसी संगठित कंपनी की तरह किए जाने के संकेत मिले हैं। इसमें हर सदस्य की भूमिका पहले से तय थी।

पुलिस के अनुसार एक टीम एमबीबीएस में दाखिले के इच्छुक अभ्यर्थियों को तलाशती थी, दूसरी उनकी सामाजिक या आरक्षित श्रेणी के अनुरूप दस्तावेज जुटाने और फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कराने की व्यवस्था करती थी, जबकि कुछ सदस्य दाखिले की पूरी प्रक्रिया संभालते थे।

विदेशों में मेडिकल दाखिला दिलाने का दावा
गिरोह की पहुंच केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं थी। पुलिस की जांच में देश के साथ मध्य एशिया के कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान तक मेडिकल दाखिला दिलाने का दावा किए जाने की बात सामने आई है।

ऐसे में गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ के साथ अब पुलिस गिरोह के पूरे नेटवर्क, इसके संपर्कों, लेनदेन और उन अभ्यर्थियों तक पहुंचने में जुटी है, जिनसे दाखिले के नाम पर रकम ली गई।

पुलिस की जांच में अब तक सामने आई भूमिकाओं से संकेत मिल रहे हैं कि गिरफ्तार आरोपित पूरे नेटवर्क का एक हिस्सा हो सकते हैं। गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी और पूछताछ के बाद अभ्यर्थी जुटाने, प्रमाणपत्र तैयार कराने, रकम के लेनदेन और दाखिला कराने की पूरी कड़ी सामने आने की संभावना है।

पुलिस बैंक खातों, मोबाइल संपर्क, दस्तावेजों और संभावित पीड़ितों की जानकारी को जोड़कर नेटवर्क की अगली कड़ियां तलाश रही है।

पहले तलाशे जाते थे ‘ग्राहक’, फिर तैयार होती थी पूरी योजना
पुलिस के अनुसार गिरोह का एक हिस्सा ऐसे अभ्यर्थियों और उनके स्वजन से संपर्क करता था, जो नीट में अपेक्षित परिणाम न आने या मनचाहे मेडिकल कालेज में प्रवेश नहीं मिलने के कारण दाखिले का रास्ता तलाश रहे थे।

उन्हें निर्धारित प्रक्रिया से अलग आसान तरीके से एमबीबीएस में प्रवेश दिलाने का भरोसा दिया जाता था। अभ्यर्थी की जरूरत और श्रेणी समझने के बाद गिरोह के दूसरे सदस्य सक्रिय होते थे।

श्रेणी का लाभ दिलाने के लिए दस्तावेजों का खेल
जांच में फर्जी प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल का पहलू भी महत्वपूर्ण है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि प्रमाणपत्र कहां और किसके माध्यम से तैयार कराए जाते थे।

दस्तावेजों के सत्यापन में सामने आई विसंगतियों को भी जांच का आधार बनाया जा रहा है। यदि यह कड़ी पुष्ट होती है तो मामला केवल अभ्यर्थियों से रकम ऐंठने तक सीमित न रहकर फर्जी दस्तावेज तैयार करने और उनका इस्तेमाल कराने वाले पूरे तंत्र तक पहुंच सकता है।

दाखिले की ‘डील’ से लेकर कालेज तक पहुंचाने की जिम्मेदारी
गिरोह में कुछ सदस्यों की भूमिका अभ्यर्थियों और उनके स्वजन से सौदा तय करने की थी, जबकि अन्य सदस्य दाखिले की प्रक्रिया पूरी कराने के नाम पर सक्रिय रहते थे।

पुलिस यह भी खंगाल रही है कि रकम किस स्तर पर तय होती थी, किस माध्यम से ली जाती थी और बाद में किन-किन लोगों तक पहुंचती थी। बैंक खातों और अन्य वित्तीय लेनदेन की पड़ताल इसी कड़ी में अहम मानी जा रही है।

विदेशों तक कनेक्शन ने बढ़ाई जांच की परिधि
विदेशी मेडिकल कालेजों में दाखिले के नाम पर संपर्क किए जाने की जानकारी ने पुलिस की जांच को राज्य से बाहर और देश से बाहर तक पहुंचा दिया है।

अब यह पता लगाया जा रहा है कि किन संस्थानों के नाम का इस्तेमाल किया गया, अभ्यर्थियों को वास्तव में कहीं प्रवेश दिलाया गया या केवल झांसा दिया गया और विदेश भेजने के लिए उपलब्ध कराए गए दस्तावेज वास्तविक थे या उनमें भी हेराफेरी की गई।