Uttarakhand News 22 Sep 2026: रुद्रपुर। साइबर अपराधियों की इंटरनेट कॉल को भारतीय मोबाइल नंबर से सामान्य कॉल में बदलकर उनकी पहचान छिपाने वाले नेटवर्क का साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन कुमाऊं परिक्षेत्र ने पर्दाफाश किया है। साइबर थाना पुलिस ने बाजपुर में किराए के कमरे से मुरादाबाद निवासी कादिर अली को गिरफ्तार किया है। उसके कब्जे से दो सिम बॉक्स, 77 एंटीना, 114 एयरटेल सिम, इंटरनेट राउटर सहित अन्य उपकरण बरामद हुए हैं।
साइबर थाना पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपित का बांग्लादेशी नागरिक से कनेक्शन है, जो हर माह इसके लिए आरोपित को 50 हजार रुपये देता था।
साइबर थाना पुलिस कर रही थी जांच
संचार मंत्रालय की ओर से मिले गोपनीय पत्र के आधार पर साइबर थाना पुलिस रुद्रपुर 72 संदिग्ध मोबाइल नंबरों की जांच कर रही थी। इनकी गतिविधियां बाजपुर के चकरपुर स्थित एक सेल साइट से जुड़ी मिली थी। जांच के दौरान पुलिस और एसटीएफ कुमाऊं की टीम ने साइबर थाना प्रभारी अरूण कुमार की अगुवाई में बाजपुर क्षेत्र के एक सिम विक्रेता से पूछताछ की।
सिम विक्रेता ने बताया कि वह अलग-अलग व्यक्तियों की पहचान पर लिए गए एयरटेल सिम मूलरूप से मिलक जुम्मा वाली, ग्राम बेरखेड़ा चेक, थाना भगतपुर मुरादाबाद यूपी निवासी कादिर को उपलब्ध कराता था। इस पर टीम ने कादिर की तलाश शुरू की तो वह घर पर नहीं मिला।
पांच हजार रुपये महीने का लिया कमरा
इसी बीच सूचना मिली कि वह बाजपुर में ईदगाह के सामने एक इमारत की दूसरी मंजिल पर किराये के कमरे में रह रहा है। पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने सोमवार देर रात उसके किराए के कमरे में दबिश दी। बिजली न होने के कारण मोबाइल और इमरजेंसी लाइट की रोशनी में टीम अंदर पहुंची, जहां कादिर मौजूद मिला। कादिर के कमरे से एक 32-स्लॉट सिम बॉक्स मिला। इसके अलावा 77 एंटीना, 114 एयरटेल सिम, इंटरनेट राउटर, नेटवर्क केबल, एडॉप्टर, मीडिया कन्वर्टर और अन्य उपकरण बरामद हुए। उसकी तलाशी में सैमसंग मोबाइल भी मिला।
पूछताछ में कादिर ने बताया कि वह इंटरनेट के माध्यम से विदेश से आने वाली साइबर अपराधियों की कॉल को सिम बॉक्स में लगे भारतीय सिम के जरिए सामान्य मोबाइल कॉल में बदलता था। इससे कॉल करने वाले का वास्तविक मोबाइल नंबर और पहचान छिप जाती थी।
बांग्लादेशी के संपर्क में रहता था
बांग्लादेश निवासी शाहिद से वाट्सएप पर संपर्क होने की बात बताई। शाहिद ने उसे सिम बॉक्स उपलब्ध कराए और इनके संचालन के बदले हर माह 50 हजार रुपये भेजता था। कादिर ने यह भी बताया कि उसने सिम बॉक्स लगाने के लिए बाजपुर में कमरा पांच हजार रुपये मासिक किराये पर लिया था।
ऐसे काम करता है सिम बॉक्स
सिम बॉक्स एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है। जिसमें एक साथ दर्जनों या सैकड़ों (32, 64 या 250 से ज्यादा) अलग-अलग मोबाइल सिम कार्ड डाले जा सकते हैं।
साइबर अपराधी कॉल बदलने के लिए दूसरे देशों में बैठकर भारत या किसी अन्य देश के लोगों को ठगने के लिए इंटरनेट (वॉइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकाल के माध्यम से कॉल करते हैं।
ये विदेशी कॉल इंटरनेट के जरिए भारत में किसी सुरक्षित जगह पर छिपाकर रखे गए सिम बॉक्स में पहुंचती हैं।
सिम बॉक्स में लगे भारतीय सिम कार्ड्स उस इंटरनेट कॉल को रिसीव करते हैं और उसे आगे एक लोकल मोबाइल कॉल में बदल देते हैं।
इसका मकसद असली नंबर छिपाना है, जबकि फोन की स्क्रीन पर जो नंबर दिखाई देता है, वह किसी विदेशी नंबर के बजाय कोई सामान्य भारतीय मोबाइल नंबर होता है।
कॉल लोकल नंबर से आने के कारण न तो आम इंसान को शक होता है और न ही टेलीकॉम कंपनियों या पुलिस के लिए इसका असली सोर्स (विदेशी लोकेशन) आसानी से ट्रैक हो पाता है।
सिम विक्रेता से अलग-अलग लोगों की पहचान पर लिए थे सिम
कादिर ने सिम विक्रेता से अलग-अलग लोगों की पहचान पर एयरटेल सिम लिए थे। इसके बदले उसे 13 हजार रुपये देने की बात भी सामने आई है। पुलिस अब बरामद सिम और उपकरणों से संचालित कॉल का ब्योरा जुटाकर यह पता लगा रही है कि इनका इस्तेमाल किन साइबर अपराधों में हुआ। बाद में साइबर थाना पुलिस ने आरोपित पर बीएनएस की धारा 111(2)(बी), 318(4), 319(1), 61(2), 3(5), आईटी एक्ट की धारा 66(सी), 66(डी) और दूरसंचार अधिनियम की धारा 42(1), 42(3) के तहत प्राथमिकी पंजीकृत कर ली है।










