Uttarakhand New 4 Sep 2026: देहरादून के तेजी से फैलते शहरी क्षेत्र में अब अवैध निर्माण पर नजर सिर्फ शिकायत या मौके के निरीक्षण के भरोसे नहीं रहेगी। एमडीडीए ड्रोन और सैटेलाइट इमेजरी के जरिये निर्माण गतिविधियों की निगरानी करेगा।

जीआइएस आधारित सिस्टम के माध्यम से क्षेत्र की तस्वीर और निर्माण की गतिविधियों का डिजिटल रिकार्ड तैयार करने की तैयारी है। इससे स्वीकृत मानचित्र से इतर होने वाले निर्माण, बिना अनुमति विकसित हो रहे क्षेत्रों और तेजी से बदलते भू-उपयोग की पहचान आसान होगी।

शहर के मौजूदा हालात में इस व्यवस्था को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। देहरादून में लगातार बढ़ते आवासीय और व्यावसायिक विस्तार के बीच सड़कें व पार्किंग जैसी बुनियादी सुविधाएं पहले ही दबाव में हैं। कई इलाकों में संकरी सड़कों पर बढ़ता निर्माण, सड़क किनारे पार्किंग और यातायात दबाव नियोजित विकास की चुनौती बन चुका है।

ऐसे में नए निर्माण की निगरानी के साथ शहर के भविष्य के विस्तार पर भी नजर रखना एमडीडीए के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की समीक्षा बैठक के बाद गुरुवार को प्राधिकरण उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने एमडीडीए मुख्यालय में सभी अधिकारियों की बैठक ली। इसमें विकास कार्यों की प्रगति के साथ ही आगामी कार्ययोजना पर मंथन किया गया। बैठक में तय हुआ कि 15 अक्टूबर तक वर्तमान में लंबित सभी सौंदर्यीकरण कार्य पूरे कर लिए जाएंगे।

आसमान से बनेगा शहर का ‘डिजिटल नक्शा’
एमडीडीए क्षेत्र की नियमित निगरानी में ड्रोन और सैटेलाइट तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा। जीआइएस के साथ इन तकनीकों को जोड़कर निर्माण की गतिविधियों में होने वाले बदलावों को चिह्नित किया जा सकेगा। इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि अवैध निर्माण पूरा होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय उसके शुरुआती चरण में ही उसे पकड़ा जा सकेगा।

प्राधिकरण स्तर पर जियो-इन्फार्मेशन आधारित मानिटरिंग सिस्टम विकसित करने पर जोर है। इससे अलग-अलग क्षेत्रों की निगरानी, निर्माण गतिविधियों की पहचान व संबंधित अभिलेखों से उनका मिलान करने की व्यवस्था मजबूत हो सकती है।

बेतरतीब विस्तार रोकना सबसे बड़ी चुनौती
देहरादून का शहरी क्षेत्र तेजी से फैल रहा है। नए आवासीय क्षेत्र विकसित हो रहे हैं तो प्रमुख मार्गों और बाजार क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां भी बढ़ रही हैं। इस विस्तार की रफ्तार के मुकाबले सड़क, पार्किंग, हरियाली और सार्वजनिक सुविधाओं का नियोजन चुनौती बना हुआ है।

यही वजह है कि एमडीडीए की नई कार्ययोजना में नक्शा पास करने से आगे बढ़कर पूरे शहर के नियोजन पर जोर दिया जा रहा है। पार्किंग के स्थायी समाधान के लिए उपलब्ध भूमि, यातायात दबाव व भविष्य की जरूरतों के आधार पर योजना तैयार होगी। वहीं, प्रमुख मार्गों के सौंदर्यीकरण, सिटी पार्क, पिंक टायलेट और सड़क सुधार के काम भी 15 अक्टूबर तक प्राथमिकता से आगे बढ़ाए जाएंगे।

जी-20 की तर्ज पर प्रमुख मार्गों का कायाकल्प
प्रमुख सड़कों, डिवाइडरों, चौराहों और सार्वजनिक स्थलों को जी-20 आयोजन की तर्ज पर विकसित करने की योजना है। हरियाली, प्रकाश, स्वच्छता और स्थानीय पहचान को इसमें शामिल किया जाएगा। हालांकि, शहर के सौंदर्यीकरण के साथ यह भी जरूरी माना जा रहा है कि सड़कों की क्षमता, पार्किंग और निर्माण नियंत्रण को समानांतर रूप से मजबूत किया जाए, ताकि सजावट के पीछे बुनियादी समस्याएं न छिपें।

अवैध निर्माण की निगरानी में ड्रोन, जीआइएस और सैटेलाइट तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा। प्राधिकरण का लक्ष्य पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ ही बेहतर नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। लंबित कार्यों की समीक्षा कर उनकी समय-सीमा और जिम्मेदारी तय की जा रही है। सड़क सुधार, सौंदर्यीकरण, पार्किंग और सार्वजनिक सुविधाओं के साथ अवैध निर्माण नियंत्रण को भी प्राथमिकता दी जा रही है।